लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
अहसास की कलम से …..
अब नए सवाल …… जिनका जवाब हरमाड़ा की सड़क मांग रही है
हरमाड़ा की सड़क आज भी खून से सनी है,
और हर कतरा जैसे चीख़ रहा है —
“अब सवालों का जवाब दो!
पहला सवाल — किसका था वो डंपर?
वो लाशें जिन पर से वह गुज़रा,
क्या अब उनकी गिनती सिर्फ़ “आंकड़ों” में होगी?
वो डंपर किसका था?
किसके नाम से रजिस्टर था?
किस कंपनी के काम में लगा था?
क्या उसका मालिक अब सामने आएगा,
या हमेशा की तरह “ड्राइवर फरार” की कहानी लिखकर
किताब बंद कर दी जाएगी?
क्योंकि इतिहास गवाह है —
हर बार हादसे के बाद,
एक चेहरा गायब हो जाता है,
बाकी सब “प्रशासनिक प्रक्रिया” के नीचे दफ़न हो जाते हैं।
दूसरा सवाल — जवाबदेही किसकी है?
क्या मुआवज़ा उस डंपर के मालिक से वसूला जाएगा,
या फिर सरकार फिर से जनता के टैक्स से
जनता के ही मरने का हिसाब चुकाएगी?
क्या अब वक्त नहीं आ गया कि
जो वाहन मौत का हथियार बनते हैं,
उनके मालिकों को भी अपराधी की कुर्सी पर बिठाया जाए?
तीसरा सवाल — मालिकों को सब पता था क्या?
