लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
राजसमंद। नवरात्रा पर्व पर राजसमंद जिले के भाटोली गांव में परंपरागत 51 फीट ऊंचा नेजा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। चामुंडा माता और कालका माता मंदिर से निकाली गई यह सरवर यात्रा में शामिल होकर बनास नदी स्थल तक पहुंची, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद जवारे विसर्जन किया गया।
गांव के मनोज सेन ने बताया कि यह परंपरा पिछले लगभग 35 वर्षों से जारी है। मान्यता के अनुसार नवरात्रा के 9 दिनों के प्रतीकस्वरूप नेजा भी 9 खंडों में तैयार किया जाता है। इस विशाल नेजे को बैलगाड़ी पर खड़ा किया जाता है और 6 रस्सियों के सहारे श्रद्धालु इसे संभालते हैं।
गाजे-बाजे और डीजे पर बजते धार्मिक भजनों के बीच निकली सरवर यात्रा गांव से 1 किलोमीटर दूर बनास नदी स्थल तक पहुंची। यहां मंदिर के भोपाजी बंशीलाल कुमावत सहित अन्य पुजारियों ने विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना कर जवारे विसर्जन संपन्न कराया।
कार्यक्रम में कालका माता के भोपाजी मांगीलाल भील, भंवरलाल कीर, शंकर कुमावत, सुरेश भील, रामचंद्र गायरी, मीठालाल कुमावत, डालचंद भील, जसराज कीर, हीरालाल टांक, श्रीकृष्ण डेरा सहित आस-पास के नाकली, एमडी, कुमारिया खेड़ा, नमाना, कांकरोली, अमलोई आदि गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
