लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
5393 वार्डों में 20 हजार से ज्यादा प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर
जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया। प्रदेश के 162 नगरीय निकायों के 5393 वार्डों में मतदाता शाम 6 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन चुनावों में 20 हजार से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हैं। मतदान से पहले मंगलवार को पोलिंग पार्टियां ईवीएम और चुनाव सामग्री लेकर अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंच गई थीं।

सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान प्रक्रिया शुरू हुई। कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की कतारें देखने को मिलीं। खासकर रोजाना मजदूरी करने वाले और ड्यूटी पर जाने वाले मतदाताओं ने सुबह-सुबह मतदान को प्राथमिकता दी। हालांकि कई मतदान केंद्रों पर बाद में मतदान दल मतदाताओं का इंतजार करते भी नजर आए।
162 निकायों में आज मतदान
पहले चरण में राजस्थान के 162 नगरीय निकायों में मतदान हो रहा है। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाएं शामिल हैं। मतदान के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ ईवीएम की सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
मतदान से पहले कई वार्डों में निर्विरोध निर्वाचन के चलते मुकाबला भी समाप्त हो चुका है। अब शेष वार्डों में मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान कर रहे हैं।
जयपुर में 565 बूथों पर मतदान
राजधानी जयपुर पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। जयपुर जिले के 18 नगरीय निकायों में 565 मतदान केंद्रों पर वोटिंग हो रही है। शहर और आसपास के निकाय क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक समीकरण भी चुनाव को दिलचस्प बना रहे हैं।

प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों में से 54 विधानसभा क्षेत्रों में आने वाले नगर निकायों में भी आज मतदान हो रहा है। इन विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी के 32 विधायक हैं। ऐसे में इन निकाय चुनावों को बीजेपी के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।
चौमूं, शाहपुरा, बगरू, चाकसू, दूदू और कोटपूतली सहित कई क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला खासा रोचक माना जा रहा है। वहीं कोटपूतली, बानसूर और विराटनगर के चुनावी परिणामों पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
बीजेपी-कांग्रेस के बीच सियासी मुकाबला
नगरीय निकाय चुनाव भले ही स्थानीय स्तर के हों, लेकिन इस बार इन चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा सियासी मुकाबला देखने को मिल रहा है।
बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी। बीजेपी का दावा है कि प्रदेश सरकार के कामकाज पर जनता अपनी मुहर लगाएगी।
वहीं कांग्रेस सरकार के खिलाफ कथित नाराजगी को चुनाव परिणाम में बदलने की उम्मीद कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी सरकार पर कई सवाल उठाए और सरकार के खिलाफ माहौल होने का दावा किया।

बीजेपी के सामने सरकार के काम को वोट में बदलने की चुनौती
बीजेपी का फोकस स्थानीय निकायों में अधिक से अधिक बोर्ड बनाने पर है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार के कामकाज और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचा है और मतदाता इन कार्यों को ध्यान में रखकर बीजेपी के पक्ष में मतदान करेंगे।
वहीं कांग्रेस की रणनीति स्थानीय समस्याओं के साथ सरकार के खिलाफ कथित नाराजगी को चुनावी मुद्दा बनाने की है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि महंगाई, सफाई, सड़क, पानी, सीवरेज और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर जनता सरकार से जवाब चाहती है।

आरएलपी की भी नजर निकाय चुनाव पर
बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबले के अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी की भी चुनाव में मौजूदगी है। पार्टी की कोशिश है कि नगरीय निकाय चुनाव में अपना खाता खोला जाए और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक पकड़ मजबूत की जाए।

स्थानीय मुद्दों पर मतदाताओं का फैसला
नगरीय निकाय चुनाव में शहरों की सड़कें, सफाई व्यवस्था, पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे अहम हैं। पार्षद से लेकर नगर पालिका और नगर निगम के बोर्ड तक इन्हीं मुद्दों पर जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।
राजनीतिक दल भले ही अपने-अपने दावे कर रहे हों, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में है। आज ईवीएम में प्रत्याशियों की किस्मत के साथ-साथ बीजेपी और कांग्रेस के दावों की भी परीक्षा हो रही है।
11 सितंबर को दूसरे चरण का मतदान, 14 सितंबर को परिणाम
राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण में बुधवार को मतदान हो रहा है। दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को होगा, जबकि चुनाव परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।
अब सबसे ज्यादा नजर मतदान प्रतिशत पर रहेगी। शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के बाद तस्वीर साफ होगी कि शहरी मतदाताओं ने किस मुद्दे को प्राथमिकता दी और किस राजनीतिक दल के पक्ष में अपना भरोसा जताया।
राजस्थान के 162 नगरीय निकायों में मतदान शुरू, 5393 वार्डों में 20 हजार से ज्यादा प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर
जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया। प्रदेश के 162 नगरीय निकायों के 5393 वार्डों में मतदाता शाम 6 बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन चुनावों में 20 हजार से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हैं। मतदान से पहले मंगलवार को पोलिंग पार्टियां ईवीएम और चुनाव सामग्री लेकर अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंच गई थीं।
सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान प्रक्रिया शुरू हुई। कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की कतारें देखने को मिलीं। खासकर रोजाना मजदूरी करने वाले और ड्यूटी पर जाने वाले मतदाताओं ने सुबह-सुबह मतदान को प्राथमिकता दी। हालांकि कई मतदान केंद्रों पर बाद में मतदान दल मतदाताओं का इंतजार करते भी नजर आए।
162 निकायों में आज मतदान
पहले चरण में राजस्थान के 162 नगरीय निकायों में मतदान हो रहा है। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाएं शामिल हैं। मतदान के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ ईवीएम की सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
मतदान से पहले कई वार्डों में निर्विरोध निर्वाचन के चलते मुकाबला भी समाप्त हो चुका है। अब शेष वार्डों में मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान कर रहे हैं।
जयपुर में 565 बूथों पर मतदान
राजधानी जयपुर पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। जयपुर जिले के 18 नगरीय निकायों में 565 मतदान केंद्रों पर वोटिंग हो रही है। शहर और आसपास के निकाय क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक समीकरण भी चुनाव को दिलचस्प बना रहे हैं।
प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों में से 54 विधानसभा क्षेत्रों में आने वाले नगर निकायों में भी आज मतदान हो रहा है। इन विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी के 32 विधायक हैं। ऐसे में इन निकाय चुनावों को बीजेपी के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।
चौमूं, शाहपुरा, बगरू, चाकसू, दूदू और कोटपूतली सहित कई क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला खासा रोचक माना जा रहा है। वहीं कोटपूतली, बानसूर और विराटनगर के चुनावी परिणामों पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
बीजेपी-कांग्रेस के बीच सियासी मुकाबला
नगरीय निकाय चुनाव भले ही स्थानीय स्तर के हों, लेकिन इस बार इन चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा सियासी मुकाबला देखने को मिल रहा है।
बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी। बीजेपी का दावा है कि प्रदेश सरकार के कामकाज पर जनता अपनी मुहर लगाएगी।
वहीं कांग्रेस सरकार के खिलाफ कथित नाराजगी को चुनाव परिणाम में बदलने की उम्मीद कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी सरकार पर कई सवाल उठाए और सरकार के खिलाफ माहौल होने का दावा किया।
बीजेपी के सामने सरकार के काम को वोट में बदलने की चुनौती
बीजेपी का फोकस स्थानीय निकायों में अधिक से अधिक बोर्ड बनाने पर है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार के कामकाज और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचा है और मतदाता इन कार्यों को ध्यान में रखकर बीजेपी के पक्ष में मतदान करेंगे।
वहीं कांग्रेस की रणनीति स्थानीय समस्याओं के साथ सरकार के खिलाफ कथित नाराजगी को चुनावी मुद्दा बनाने की है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि महंगाई, सफाई, सड़क, पानी, सीवरेज और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर जनता सरकार से जवाब चाहती है।
आरएलपी की भी नजर निकाय चुनाव पर
बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबले के अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी की भी चुनाव में मौजूदगी है। पार्टी की कोशिश है कि नगरीय निकाय चुनाव में अपना खाता खोला जाए और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक पकड़ मजबूत की जाए।
स्थानीय मुद्दों पर मतदाताओं का फैसला
नगरीय निकाय चुनाव में शहरों की सड़कें, सफाई व्यवस्था, पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे अहम हैं। पार्षद से लेकर नगर पालिका और नगर निगम के बोर्ड तक इन्हीं मुद्दों पर जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।
राजनीतिक दल भले ही अपने-अपने दावे कर रहे हों, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में है। आज ईवीएम में प्रत्याशियों की किस्मत के साथ-साथ बीजेपी और कांग्रेस के दावों की भी परीक्षा हो रही है।
11 सितंबर को दूसरे चरण का मतदान, 14 सितंबर को परिणाम
राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण में बुधवार को मतदान हो रहा है। दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को होगा, जबकि चुनाव परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।
अब सबसे ज्यादा नजर मतदान प्रतिशत पर रहेगी। शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के बाद तस्वीर साफ होगी कि शहरी मतदाताओं ने किस मुद्दे को प्राथमिकता दी और किस राजनीतिक दल के पक्ष में अपना भरोसा जताया।
















































