जयपुर। एक के बाद एक कई पत्र लिखने के बावजूद गहलोत सरकार में पूर्ववर्ती वसुंधऱा राजे सरकार में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच नहीं होने से नाराज सचिन पायलट अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ 11 अप्रेल को एक दिवसीय अनशन पर शहीद स्मारक पर बैठेंगे। पायलट ने आज गहलोत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में किया। पायलट ने कहा कि जब हम 2013 में विधानसभा चुनाव हार गए थे तब सोनिया गांधी ने मुझे पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी थी।
उस समय मौजूदा वसुंधरा राजे सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया था। भ्रष्टाचार के मुददों को उठाया था। 28 मार्च 2022 को पहली चिट्टी लिखी थी 2 नवंबर 2022 को दूसरी चिट्टी लिखी लेकिन उसका भी कोई जवाब सरकार की ओर से नहीं आया। जबकि हम चाहते है कि हमारी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं रहे। खनन, जमीन घोटाले सहित अन्य घोटालों की निष्पक्ष जांच होती तो आज दोषी जेल में होते। लेकिन उनका कोई जवाब सरकार की ओर से नहीं आने हमारी भी विश्वसनीयता पर सवाल उठते कि हमने आरोप हवा लगा दिए। यदि जांच होती तो असली दोषी अंदर होते। क्योंकि हम जनता से वादा करके आए थे कि जब हमारी पार्टी की सरकार आएगी तो हम इसकी निष्पक्ष जांच कराएंगे। हमारी सरकार बने 42 महीने हो चुके लेकिन बार- बार मांग के बावजूद किसी तरह की जांच नहीं हो रही। अब आखिरकार शहीद स्मारक पर अनशन पर बैठूंगा। पायलट की इस घोषणा से सियासत के गलियारों में चर्चाएं जोरों पर है। कल से सचिन पायलट के पार्टी से बगावत करने के चर्चे थे। गहलोत खेमा भी इस बात पर नजर गड़ाए बैठा था कि पायलट का अगला कदम क्या होगा। गहलोत तो चाहते ही हैं कि पायलट एक बार पार्टी छोड़ दे। लेकिन सचिन पायलट दूसरे साथी नेताओं जैसी गलतियां नहीं दोहराएंगे। वे कांग्रेस में रहकर विरोधी खेमे की नीद उड़ाएंगे। क्योंकि यहां उनकी सालों की तपस्या के फल का समय आने वाला है भला वे इस समय कैसे इसे छोड़ दे। भले ही गहलोत उनके धूर विरोधी हो लेकिन जो विश्वास उन्होंने अपने दम पर कमाया है उसे कैसे तोड़ दे। फिर ये राजनीति है।
