पिता और भाई बन कर अनिल अग्रवाल ने कराया 66 कन्याओं का विवाह

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 

धौलपुर ।  तीर्थराज मचकुंड में आयोजित सर्व समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल बनकर सामने आया। समाजसेवी अनिल अग्रवाल ने समाज और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर उन बेटियों के लिए पिता, भाई और अभिभावक की भूमिका निभाई, जिनके सिर पर न मां-बाप का साया है और न ही परिवार का सहारा।

अनिल  अग्रवाल  बने  दूत 

बताया जाता है कि अनिल अग्रवाल साल भर ऐसे परिवारों और बच्चियों की तलाश करते हैं, जिनके माता-पिता नहीं हैं या जो बेहद गरीब और असहाय हैं। वे स्वयं लोगों के बीच जाकर ऐसी अनाथ और जरूरतमंद बेटियों को ढूंढते हैं और फिर उन्हें अपने परिवार की तरह अपनाकर उनके विवाह की पूरी जिम्मेदारी उठाते हैं।

इसी कड़ी में इस वर्ष तीर्थराज मचकुंड में आयोजित आठवें सर्व समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन में 66 कन्याओं का विवाह पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ संपन्न कराया गया। इससे पहले भी वे सात ऐसे आयोजन कर चुके हैं, जिनके माध्यम से सैकड़ों जरूरतमंद बेटियों का घर बसाया जा चुका है।

इस सामूहिक विवाह सम्मेलन की खास बात यह रही कि इसमें हिंदू, मुस्लिम और सिख सभी धर्मों की बेटियां शामिल हुईं। कुल 66 कन्याओं में 47 हिंदू, 9 मुस्लिम और 10 सिख समुदाय से थीं। सभी जोड़ों के विवाह उनकी धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग पंडालों में संपन्न कराए गए—हिंदू जोड़ों ने अग्नि के साक्षी में सात फेरे लिए, मुस्लिम जोड़ों का निकाह पढ़ाया गया और सिख जोड़ों ने गुरुबाणी के बीच फेरे लेकर वैवाहिक बंधन में बंधे।

विवाह के दौरान हर बेटी की शादी बिल्कुल एक परिवार की तरह करवाई गई। वर-वधू को आशीर्वाद दिया गया और बेटी की विदाई भी उसी भावुक माहौल में की गई, जैसे किसी घर की बेटी को विदा किया जाता है। नवदंपतियों को गृहस्थ जीवन शुरू करने के लिए कपड़े, घरेलू सामान और आभूषण भी भेंट किए गए।

अनिल अग्रवाल द्वारा पहले आयोजित सम्मेलनों में जिन बेटियों का विवाह कराया गया था, वे आज अपने घरों में खुशहाल जीवन जी रही हैं। कई बेटियां आज भी उन्हें अपने भाई की तरह मानती हैं और हर साल रक्षाबंधन पर राखी भेजकर उनकी लंबी उम्र और सलामती की दुआ करती हैं।

इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे और नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। लोगों का कहना है कि अनिल अग्रवाल ने जिस तरह धर्म और समाज की सीमाओं से ऊपर उठकर अनाथ और जरूरतमंद बेटियों का घर बसाने का काम किया है, वह सच में समाज के लिए एक प्रेरणादायकq मिसाल है।

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