जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर है मासूम

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जिम्मेंदारो नें ही फेरा मुँह

विकास अधिकारी, जिला कलेक्टर कार्यालय तक लेटर भिजवाये, किसी ने नही ली सुध

जयपुर। राजधानी जयपुर से मात्र 20 किलोमीटर दुर स्थित जगन्नाथपुरा ग्राम के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई के नाम पर छोटे बच्चों के भविष्य और जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सरकारी स्कूल की हालत जर्जर हो चुकी है। स्कूल किसी भी वक्त धराशाई हो सकता है।

स्कूल भवन के नाम पर खंडहर भवन की छत जर्जर हो चुकी है और कालम झुक गए हैं। आलम यह है कि हाथ लगाने मात्र से छत का मलबा गिर जाता है। बावजूद इसके जर्जर हो चुके भवन में ही स्कूल का संचालन किया जा रहा है। गौरतलब है कि पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया स्लोगन तो आमतौर पर हर जगह लिखा मिल ही जाता है।

लेकिन जर्जर और बरसात में टपकती छतों के नीचे कैसे पढ़ेगा इंडिया। ऐसा ही हाल पंचायत समिति सागांनेर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जगन्नाथपुरा का है। जहां बच्चे जर्जर कमरों में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हो रहे हैं।
जगन्नाथपुरा की सरकारी स्कूल के भवन के जर्जर कमरों की टपकतीं छतें और उसके नीचे शिक्षा ग्रहण करते 80 बच्चों को देखकर लगता है कि ऐसे कैसे सुधरेगा इन बच्चों का भविष्य। सुविधा के नाम पर सरकारे सिर्फ खानापुर्ति करती कर रही है।जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से संपर्क किया गया लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। स्कूल में प्रधानाचार्य कक्ष के अलावा अन्य 5 कक्ष है जिनमें विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है। इन सभी कक्षों की हालत यह है कि छत का प्लास्टर लगातार गिर रहा है और अब तो छत के सरिये भी दिखने लगे है। विगत 5 वर्षों से भवन की छत जर्जर हो चुकी है , कुछ दिन पहले प्लास्टर का एक हिस्सा पढ़ाई कर रहे बच्चों पर गिर गया गनीमत रही कि कोई बच्चा चोटिल नहीं हुआ।

दरअसल जयपुर जिले से सटा यह स्कूल, दूसरे स्कूल के लिए एक नजीर होना चाहिए। लेकिन यहां तो स्थित उलट है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर होती स्कूल की हालात को देखकर उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है खुद बच्चे भी डरने लगे हैं टीचरों में भी भैर रहता है की कहानी है स्कूल का मालवा उन पर नहीं गिर जाए और कोई बड़ी अनहोनी नहीं हो जाए। ग्रामीण लगातार इसकी शिकायत स्थानीय विधायक कैलाश चंद्र वर्मा को भी कर चुके हैं और उससे पूर्व में गंगा देवी को भी उन्होंने कई बार शिकायतें दी । लेकिन आज तक कुछ भी नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि जब राजधानी जयपुर से सटे हुए गांव में सरकारी स्कूल की यह हालत है तो दूर दराज में सरकारी स्कूलों की हालत कैसी होगी? इसका ताजा सहज रह सकते हैं ।सबसे खास बात है कि न तो यहां पर जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न,हीं सरकारी महकमा। स्कूल विभाग को भी कई बार लिखित में शिकायतें भेजी जा चुकी है ।लेकिन अभी तक भी किसी ने ध्यान नहीं दिया हो सकता है सभी को किसी बड़े हादसे का इंतजार हो और उसके बाद नेता और प्रशासन जागे!

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