लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
अब तक का ट्रैक रिकोर्ड पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को राज्यसभा भेजती रही है बीजेपी
जयपुर । राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनावों की कवायद तेज हो गई है। दरअसल जून 2026 में राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने जा रही है । 10 में से 3 सीटों पर राज्यसभा सांसद भाजपा के राजेंद्र गहलोत, केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू और कांग्रेस के नीरज डांगी का कार्यकाल पूरा होगा। ऐसे में फिर राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट पर आसानी से जीत मिल सकती है। लेकिन भाजपा दो सीटों पर किसको भेजेगी ये सबसे बड़ा सवाल है। भाजपा के पुराने ट्रेक को देखा जाए तो सतीश पूनियां एक सीट के लिए सबसे मजबूत दावेदार है। वे बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और जाट समाज से आते है। केंद्र में फिलहाल जाट समाज का कोई ऐसा कदावर नेता नहीं जो बीजेपी के लिए प्रभावी साबित हो सके। इससे पूर्व भी प्रदेश अध्यक्षों को बीजेपी राज्यसभा भेजती रही है। रही बात कांग्रेस की तो इसका निर्णय कांग्रेस आलाकमान ही करेगा.. इसलिए नेताओं की दौड़ भाग शुरु हो गई है।
पूर्व प्रदेशाध्यक्षों को राज्यसभा भेजने का ट्रेक रहा बीजेपी का
भाजपा में लंबे समय से प्रदेश अध्यक्षों को राज्यसभा में भेजने का चलन रहा है। इसको आप इस तरह समझ सकते है। रामदास अग्रवाल, ओम माथुर, ललित किशोर चतुर्वेदी, महेश शर्मा,मदन लाल सैनी, मदन राठौड़ ये तमाम वो नाम है जो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे लेकिन स्थानीय राजनीति में टिकट के आधार पर इनमें से कोई भी नेता लोक सभा नहीं पहुंचे था लेकिन भाजपा ने इन्हें राज्यसभा में भेजकर सम्मान दिया। सभी नेता पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुए। सतीश पूनिया बीजेपी के पावरफूल प्रदेश अध्यक्ष रहे। विधानसभा चुनावों से पूर्व उन्हें हटाया गया। पांच साल सरकार से लड़े वो लेकिन चुनावों से पूर्व हटा दिया गया. वे अपनी विधानसभा सीट पर प्रोपर ध्यान नहीं दे सके और विधानसभा चुनाव में खुद की सीट से हार गए। इसके बाद उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया। उनके नेतृत्व में हरियाणा में बीजेपी की सरकार बनी। राजस्थान में जाट समाज करीब 60 सीटों पर सीधा दबदबा रखते है। 40-45 विधायक दोनों राजनीतिक दलों से जीतकर आते है। हरियाणा भी जाट बैल्ट है। ऐसे में यदि पार्टी को जाट वोट बैंक को साधना है तो , एक सीट पर सतीश पूनियां का नाम सबसे मुफीद माना जा सकता है। ऐसा करके बीजेपी अपना पुराना इतिहास भी दोहरा देगी क्योंकि पूर्व में भी प्रदेश अध्यक्षों को राज्यसभा भेजा गया था। इसलिए एक सीट पर सतीश पूनियां स्वाभाविक तौर पर सबसे मजबूत दावेदार है। सतीश पूनियां से ज्यादा जाट समाज को उनके राज्यसभा जाने का इंतजार है।
राजेंद्र सिंह राठौड़ भी मजबूत दावेदार
दूसरी सीट के सबसे मजबूत दावेदार पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ को मान सकते है। राजेंद्र सिंह राठौड़ ने नेता प्रतिपक्ष रहते तत्कालीन गहलोत सरकार को घेरने का काम किया। विधानसभा चुनावों में वे मजेबूती से विपक्ष से लड़े। राठौड़ भले ही खुद विधानसभा चुनाव हार गए लेकिन वे राजपूत समाज के बड़े कद्दावर नेताओं में से एक है। वर्तमान में राजेंद्र सिंह राठौड़ के अलावा कोई भी ऐसा राजपूत नेता बीजेपी में नहीं है अपने दम पर भीड़ जुटा सकता हो। इसलिए पार्टी ने उन्हें जब- जब मौका दिया वे पार्टी के लिए तूरुप का ईक्का साबित हुए। माना जा रहा है कि पार्टी राजपूत वोट बैंक को साधने के लिए राजेंद्र सिंह राठौड़ को राजस्थान की दूसरी सीट से राज्यसभा भेज सकती है। जिससे उनके राज्यसभा जाने से आने वाले समय में राजपूत समाज की पार्टी से नाराजगी दूर की जा सके।
रवनीत सिंह बिट्टू का मामला अधर में
हालांकि एक नाम केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का भी लिया जा रहा है। लेकिन जिस समय रवनीत सिंह बिटटू को मंत्री मंडल में इसलिए शामिल किया गया था जिससे उनके आने से सिख मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके। लेकिन रवनीत बिट्टू सिख मतदाताओं पर कोई असर नहीं छोड़ सके. इसलिए रवनीत सिंह बिट्टू को शायद ही राज्यसभा भेजे।
कांग्रेस का निर्णय आलाकमान करेगा
दूसरी ओर कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस में आज भी आलाकमान की ही अंतिम चलती है। पूर्व में नीरज डांगी को राज्यसभा भेजा गया था। इस बार भी एक सीट पर नाम दिल्ली से ही तय होकर आएगा। कांग्रेस पार्टी में कई नेता राज्यसभा जाने के लिए लड़ रहे हैं। जिसे पार्टी मंजूरी देगी वही मैदान में उतरेगा। इसलिए कांग्रेस के नेता अंदरखाने अपनी – अपनी गोठियां बैठाने में लगे है, जिससे राज्सभा जा सके। लेकिन तस्वीर साफ है की तीनों सीटों में से दो पर बीजेपी और एक पर कांग्रेस पार्टी के लोग राज्यसभा जाएंगे। लेकिन जाएंगे कौन इसका खुलासा आने वाले कुछ दिनों मे हो जाएगा। फिलहाल तो सभी को पार्टी के निर्देशों का इंतजार है।














































