लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
378 औषधीय पौधों का डिजिटल भंडार अब पोर्टल पर उपलब्ध
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क, जयपुर
(रूपनारायण सांवरिया)
भाजपा राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने सदन में द्रव्य पोर्टल से संबंधित परियोजना के महत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पहल पारंपरिक आयुष ज्ञान को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने और वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम है। उनके सवाल पर आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने द्रव्य पोर्टल की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
आयुर्वेद ज्ञान का डिजिटल स्वरूप
सांसद राठौड़ ने कहा कि आयुर्वेद अपनी वैज्ञानिकता और समृद्ध विरासत के कारण पूरे विश्व में प्रतिष्ठित है। ऐसे में “द्रव्य पोर्टल” इस गौरवशाली परंपरा को डिजिटल युग से जोड़ते हुए वैश्विक मंच पर स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। यह पोर्टल आयुष विज्ञान के प्रामाणिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़कर भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली में भारत के नेतृत्व को सशक्त करने का प्रयास है।
कैसे काम करता है द्रव्य पोर्टल?
आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि यह पोर्टल केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) द्वारा विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आयुष द्रव्यों—आहार और औषधि—का एक प्रमाणिक, शोध-आधारित और पुन: उपयोगी डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है।
पोर्टल की विशेषताएं—
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सरल और उपयोगकर्ता अनुकूल इंटरफेस
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समर्पित सर्च बॉक्स
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शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए त्वरित सूचना उपलब्धता
पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी में आयुर्वेद विवरण, पादपशास्त्र, रसायनशास्त्र, फार्मेसी और फार्माकोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
378 औषधीय पौधों की प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध
पोर्टल को आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर 2025 को लॉन्च किया गया था। अब तक इसमें 378 औषधीय पौधों की वैज्ञानिक और प्रमाणिक जानकारी अपलोड की जा चुकी है।
इन पौधों का चयन—
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आयुर्वेद में उपयोग
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प्राचीन ग्रंथों में वर्णित महत्व
इनके आधार पर किया गया है, जिससे पोर्टल की विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।
अन्य डिजिटल पहलों से भी जुड़ेगा पोर्टल
आयुष मंत्रालय इस पोर्टल को अपनी अन्य प्रमुख डिजिटल पहलों से जोड़ने की योजना बना रहा है, जिससे—
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स्वास्थ्य क्षेत्र में मानकीकरण
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अनुसंधान सहयोग
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आसान पहुंच
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भारत की वैश्विक पहचान
को और अधिक मजबूती मिलेगी।
भारतीय चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक पहचान दिलाने का कदम
के लिए ज्ञान का एक विश्वसनीय मंच भी बना रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में अग्रणी स्थान दिलाने की दिशा में यह पहल एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।


















































