एआई से टीबी की पहचान, मलेरिया की स्वदेशी वैक्सीन जल्द, कोरोना वैक्सीन से हार्ट अटैक नहीं- आईसीएमआर

0
37
- Advertisement -

कॉविड वैक्सीन से कोई हार्ट अटैक नहीं- ICMR विशेषज्ञों की दो टूक

महामारी से मुकाबले के लिए डायग्नोस्टिक सिस्टम भी तैयार

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

अब  AI से  एक्स-रे से होगी टीबी की पहचान

मलेरिया के लिए स्वदेशी मल्टी-स्टेज वैक्सीन पर काम

भुवनेश्वर से नीरज मेहरा की रिपोर्ट

भुवनेश्वर। कोरोना महामारी के बाद हार्ट अटैक से होने वाली मौतों को कोविड वैक्सीन से जोड़कर सोशल मीडिया पर लगातार फैल रही चर्चाओं के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की विशेषज्ञ डॉ. संघमित्रा पति ने कहा कि उपलब्ध शोध के आधार पर कोविड वैक्सीन को हार्ट अटैक का कारण मानने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने ऐसी सूचनाओं को लेकर लोगों से सोशल मीडिया की अपुष्ट बातों के बजाय वैज्ञानिक प्रमाणों पर भरोसा करने की अपील की।
ICMR-Regional Medical Research Centre, भुवनेश्वर की निदेशक डॉ. संघमित्रा पति सार्वजनिक स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों, स्वास्थ्य प्रणाली और संक्रमण संबंधी शोध के क्षेत्र में काम कर रही हैं।


अब एआई बताएगा एक्स-रे में टीबी का संकेत

स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का उपयोग आने वाले समय में केवल कंटेंट, तस्वीर या सामान्य डिजिटल काम तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसका इस्तेमाल चेस्ट एक्स-रे के विश्लेषण और टीबी की शुरुआती पहचान में भी बढ़ाया जा रहा है।
इसका सबसे बड़ा फायदा उन ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में हो सकता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर, रेडियोलॉजिस्ट या अत्याधुनिक जांच सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
ICMR के भुवनेश्वर केंद्र ने टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रतिक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से एक मेगा टीबी एलिमिनेशन प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। संस्थान की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह परियोजना केंद्रीय टीबी प्रभाग और ओडिशा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से आगे बढ़ाई जा रही है।
एआई आधारित तकनीक का उद्देश्य डॉक्टर की जगह लेना नहीं, बल्कि जहां विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं वहां स्क्रीनिंग और संभावित मरीजों की पहचान में मदद करना है। ऐसे मामलों में संदिग्ध रिपोर्ट आने पर मरीज को आगे की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जा सकता है।


कोरोना के दौरान तैयार लैब अब मलेरिया से लड़ने में भी आएगी काम

कोविड महामारी के दौरान तैयार किए गए अत्याधुनिक प्रयोगशाला ढांचे को अब दूसरे संक्रामक रोगों की जांच और शोध में इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ICMR-RMRC भुवनेश्वर के पास वायरल रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक लैब, सीक्वेंसिंग लैब, वैक्सीन डेवलपमेंट लैब, COBAS लैब और टीबी के लिए नेशनल रेफरेंस लैब जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
इसका उद्देश्य केवल किसी एक बीमारी की जांच तक सीमित नहीं है। संक्रमण फैलाने वाले नए वायरस की पहचान, रोगों की निगरानी और तेजी से डायग्नोसिस करने के लिए मजबूत प्रयोगशाला नेटवर्क को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मलेरिया के खिलाफ भारत की स्वदेशी वैक्सीन पर बड़ा काम
मच्छर जनित मलेरिया से मुकाबले के लिए ICMR-Regional Medical Research Centre, भुवनेश्वर ने एक महत्वपूर्ण स्वदेशी वैक्सीन कैंडिडेट विकसित किया है।
इसे AdFalciVax नाम दिया गया है। ICMR के अनुसार यह एक recombinant chimeric multi-stage malaria vaccine है, जिसे Plasmodium falciparum के खिलाफ विकसित किया गया है। यह परजीवी मलेरिया के गंभीर रूप के लिए जिम्मेदार है।
इस वैक्सीन की खासियत यह है कि इसे मलेरिया परजीवी के अलग-अलग महत्वपूर्ण चरणों को लक्ष्य करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य केवल व्यक्ति को संक्रमण से बचाना ही नहीं, बल्कि मच्छर के माध्यम से होने वाले community transmission को भी कम करना है।
इस परियोजना में ICMR-RMRC भुवनेश्वर के साथ ICMR-National Institute of Malaria Research और National Institute of Immunology की विशेषज्ञता भी जुड़ी है।


अभी वैक्सीन  अंतिम चरण में

मलेरिया वैक्सीन को लेकर उत्साह के बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इसे अभी सामान्य उपयोग के लिए उपलब्ध वैक्सीन नहीं माना जा सकता। ICMR के दस्तावेज में इसकी टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल-4 और थर्ड पार्टी वैलिडेशन जारी बताया गया है। ICMR ने 2025 में इसके टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए भी Expression of Interest जारी किया था।
अर्थात आगे क्लिनिकल विकास, नियामकीय मूल्यांकन और आवश्यक परीक्षणों के बाद ही इसके मानव उपयोग और व्यापक उपलब्धता का रास्ता साफ होगा।
मलेरिया के खिलाफ DAMaN मॉडल
ओडिशा में मलेरिया नियंत्रण के लिए DAMaN कार्यक्रम पहले से महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। ICMR से जुड़े शोध में इसे सक्रिय निगरानी और उपचार के माध्यम से मलेरिया के बोझ को कम करने वाले कार्यक्रम के रूप में दर्ज किया गया है।
DAMaN का उद्देश्य उन क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना रहा है जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जंगलों और जनजातीय आबादी के बीच बीमारी की निगरानी चुनौतीपूर्ण होती है।
अब वैक्सीन अनुसंधान, आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं और फील्ड-आधारित निगरानी को एक साथ जोड़कर मलेरिया उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश हो रही है।


डेंगू के खिलाफ भी वैक्सीन पर शोध

मलेरिया के साथ डेंगू भी देश के लिए बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। डेंगू के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने और उसके परीक्षण की दिशा में भी शोध चल रहा है।
डेंगू के गंभीर रूपों को रोकने के लिए प्रभावी वैक्सीन विकसित करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बीमारी का प्रभाव केवल संक्रमण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कुछ मरीजों में गंभीर जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं।
इस क्षेत्र में भी किसी वैक्सीन के आम इस्तेमाल से पहले वैज्ञानिक परीक्षण, सुरक्षा मूल्यांकन और नियामकीय मंजूरी की पूरी प्रक्रिया जरूरी है।
आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
डॉ. संघमित्रा पति के अनुसार जनजातीय आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।
ICMR-RMRC भुवनेश्वर की शोध गतिविधियों में ग्रामीण और कठिन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया गया है। संस्थान की आधिकारिक जानकारी में मलेरिया, टीबी, वेक्टर-बोर्न डिजीज, पर्यावरणीय निगरानी, प्राथमिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने जैसे क्षेत्र प्रमुख अनुसंधान विषयों में शामिल हैं।
जनजातीय क्षेत्रों में बीमारी की समय पर पहचान, स्क्रीनिंग, उपचार तक पहुंच और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को मजबूत किए बिना किसी भी राष्ट्रीय उन्मूलन अभियान को पूरी तरह सफल बनाना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

टीबी अभी भी बड़ी चुनौती, जल्दी पहचान पर जोर

भारत में टीबी को खत्म करने के लक्ष्य के बावजूद बीमारी की चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में जल्दी पहचान, सही जांच और समय पर उपचार को सबसे महत्वपूर्ण हथियार माना जा रहा है।
इसी दिशा में ICMR-RMRC भुवनेश्वर ने टीबी उन्मूलन के लिए मेगा प्रोजेक्ट शुरू किया है। संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार इसका उद्देश्य स्वास्थ्य प्रणाली की टीबी उन्मूलन संबंधी प्रतिक्रिया को तेज करना है।
आने वाले समय में एआई आधारित चेस्ट एक्स-रे विश्लेषण जैसी तकनीकें ऐसे इलाकों में उपयोगी हो सकती हैं जहां हर जगह विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं हैं।
एक साथ कई वायरस की पहचान की तैयारी
कोविड महामारी ने दुनिया को यह सिखाया कि किसी नए संक्रमण की पहचान में देरी कितनी बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी अनुभव के बाद देश में वायरस की निगरानी, जीनोमिक सीक्वेंसिंग और डायग्नोस्टिक क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया गया।
ICMR-RMRC भुवनेश्वर में वायरस रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक लैब और सीक्वेंसिंग लैब जैसी सुविधाएं इसी व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा ढांचे का हिस्सा हैं।
इसका उद्देश्य नए या उभरते संक्रमणों की जल्द पहचान करना और बीमारी के फैलाव की निगरानी को बेहतर बनाना है।
बीमारी से लड़ाई अब सिर्फ एक पद्धति से नहीं
स्वास्थ्य क्षेत्र में अब बीमारी के इलाज के साथ रोकथाम, स्क्रीनिंग, पोषण, जीवनशैली, महामारी विज्ञान और विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के बीच समन्वय पर भी जोर बढ़ रहा है।
गंभीर बीमारियों के खिलाफ प्रभावी रणनीति के लिए वैज्ञानिक शोध के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, मरीजों की समय पर पहचान और उन्हें उचित उपचार तक पहुंचाना सबसे जरूरी कड़ी है।
सोशल मीडिया की अफवाहों से ज्यादा जरूरी वैज्ञानिक प्रमाण
कोविड के बाद हार्ट अटैक और वैक्सीन को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी एक घटना या व्यक्तिगत अनुभव को वैज्ञानिक निष्कर्ष मानना उचित नहीं है।
डॉक्टर और वैज्ञानिक किसी वैक्सीन या बीमारी के बीच संबंध का आकलन बड़े स्तर के वैज्ञानिक आंकड़ों, महामारी विज्ञान संबंधी अध्ययन और सुरक्षा निगरानी के आधार पर करते हैं। इसलिए स्वास्थ्य संबंधी संवेदनशील दावों को सोशल मीडिया संदेशों के बजाय विश्वसनीय चिकित्सा संस्थानों और वैज्ञानिक अध्ययनों से जांचना जरूरी है।

भुवनेश्वर स्थित ICMR का क्षेत्रीय केंद्र अब केवल शोध संस्थान नहीं, बल्कि भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए तकनीक, वैक्सीन और डायग्नोस्टिक क्षमता विकसित करने वाले महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
एक तरफ एआई आधारित चेस्ट एक्स-रे से दूरदराज क्षेत्रों में टीबी की जल्दी पहचान की संभावना है, दूसरी तरफ AdFalciVax जैसी स्वदेशी मल्टी-स्टेज मलेरिया वैक्सीन पर काम आगे बढ़ रहा है। मलेरिया नियंत्रण के लिए DAMaN जैसे फील्ड कार्यक्रम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, वायरस निगरानी और टीबी उन्मूलन परियोजनाएं मिलकर भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
आने वाली स्वास्थ्य लड़ाई का आधार केवल नई दवा या वैक्सीन नहीं होगा, बल्कि समय पर बीमारी की पहचान, मजबूत प्रयोगशाला नेटवर्क, एआई जैसी नई तकनीक और अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा की पहुंच होगी। भुवनेश्वर का ICMR केंद्र इसी बदलते स्वास्थ्य मॉडल की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here