लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
रितू मेहरा
विटामिन D क्या है?
विटामिन D एक वसा-घुलनशील विटामिन है जो शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण के लिए जरूरी है। यह हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को मजबूत रखने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी स्वस्थ रखता है। इसे “सनशाइन विटामिन” भी कहा जाता है क्योंकि इसका मुख्य स्रोत सूरज की रोशनी है।
विटामिन D की कमी के लक्षण
विटामिन D की कमी धीरे-धीरे असर दिखाती है। शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। आम लक्षण इस प्रकार हैं:
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थकान और कमजोरी- जिसके शरीर में विटामिन डी की कमी होती हे उसे थकान महसूस होती है। थोड़ा सा काम करते ही थकान होने लगती है। काम करते समय कमजोरी भी महसूस होती है। यदि आपका शरीर जल्द थकान महसूस करता है और कमजोरी सी आती है तो हो सकता है आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो ।
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मांसपेशियों में दर्द और अकड़न– – जिसके शरीर में विटामिन डी की कमी होती है उसके शरीर की मांसपेशियों में दर्द और अकड़न महसूस होता है। यदि ऐसा कोई लक्षण हो तो जरुर डॅाक्टर को दिखाएं
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हड्डियों में दर्द या कमजोरी – विटामिन डी की कमी से व्यक्ति की हड्डियों में दर्द या कमजोरी रहती है। लगातार हड्डियों में दर्द महसूस हो और कमजोरी का अहसास हो तो जरुर चैक कराएं।
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बार-बार सर्दी-जुकाम या संक्रमण होना- विटामिन डी की कमी से व्यक्ति को बार-बार सर्दी- जुकाम या संक्रमण होना आम बात है। जिसके शरीर में विटामिन डी की कमी होती है उसे बार -बार सर्दी जुकाम होती है। यदि ऐसा कोई लक्षण दिखे तो हो सकता है आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो।
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घाव भरने में समय लगना– चोट लगने पर लंबे समय तक घाव नहीं भरना। घाव नहीं भरने पर भी
ऐसा माना जाता है की कहीं न कहीं विटामिन डी की कमी से हो सकता है। जिसके शरीर में विटामिन डी की कमी होती है उसका घाव जल्दी से नहीं भरता है। बाल झड़ना- आपके बाल लगातार झड़ रहे है। कई लोगों के नहाते समय लगातार बाल गिरते है यदि ऐसा हो रहा है तो चिंता की बात नहीं है क्योंकि जिसके शरीर में विटामिन डी की कमी होती है उसके बाल झड़ना शुरु हो जाते है। -
मूड स्विंग और डिप्रेशन के लक्षण – विटामिन डी की कमी से व्यक्ति का मूड स्विंग करता है और आदमी डिप्रेशन का शिकार होने लगता है।
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बच्चों में हड्डियों का विकार (रिकेट्स) विटामिन डी की कमी से बच्चों में हड्डियों की कई विकार हो जाते है। जैसे हडिडयों का टेडा होना , उठने – बैठने में दिक्कत आना।

विटामिन D की कमी से होने वाली बीमारियाँ
लंबे समय तक विटामिन D की कमी इन बीमारियों का कारण बन सकती है:
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ऑस्टियोपोरोसिस – हड्डियों का कमजोर और भुरभुरा हो जाना
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रिकेट्स – बच्चों में हड्डियों का टेढ़ा होना
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ऑस्टियोमलेशिया – वयस्कों में हड्डियों में नरमी और दर्द
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कमजोर इम्यून सिस्टम – बार-बार संक्रमण होना
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हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ना
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टाइप-2 डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों का रिस्क
विटामिन D के प्राकृतिक स्रोत
हालांकि सूरज की रोशनी इसका सबसे अच्छा स्रोत है, लेकिन कुछ खाद्य पदार्थों से भी इसे पाया जा सकता है:
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सूरज की रोशनी – रोजाना सुबह 8 से 10 बजे के बीच 15–20 मिनट धूप लेना
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मछली – साल्मन, टूना, सार्डिन
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अंडे की जर्दी
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दूध और डेयरी उत्पाद (फोर्टिफाइड)
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मशरूम (विशेषकर धूप में उगाए गए)
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फोर्टिफाइड अनाज और जूस
ध्यान दें: विटामिन D प्राकृतिक रूप से बहुत कम फलों और सब्जियों में पाया जाता है, इसलिए इसके लिए धूप और फोर्टिफाइड फूड पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है।
विटामिन D की अधिकता के नुकसान (Vitamin D Toxicity)
हालांकि इसकी कमी आम है, लेकिन सप्लीमेंट्स का जरूरत से ज्यादा सेवन खतरनाक हो सकता है।
अधिकता से होने वाले नुकसान:
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उल्टी और मितली
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कब्ज या डायरिया
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कमजोरी और थकान
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किडनी में कैल्शियम जमा होना (किडनी स्टोन)
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हड्डियों में कमजोरी
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हृदय की धड़कन में अनियमितता
नोट: सामान्यत: शरीर धूप से जितना विटामिन D बनाता है, उससे अधिकता नहीं होती। समस्या तब होती है जब लंबे समय तक बहुत ज्यादा डोज़ में सप्लीमेंट लिया जाए।
निष्कर्ष
विटामिन D न केवल हड्डियों बल्कि पूरे शरीर के लिए जरूरी है। इसकी कमी से गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं, और अधिकता भी नुकसानदेह है। संतुलित आहार, पर्याप्त धूप और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट लेकर आप विटामिन D का स्तर सही रख सकते हैं।