लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
त्रिवेणी से हुआ सुविचार अभियान का आगाज, सुमेरगढ़ रिसॉर्ट में संगोष्ठी आयोजित
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं पूर्व सरकार्यवाह सुरेश चंद्र जोशी (भैयाजी) ने कहा कि भारत का अपना एक चिंतन और सोच है, जो प्राचीन काल से ही शाश्वत, सर्वकालिक और सभी के लिए रही है। भारत की विचारधारा कभी संकुचित नहीं रही, बल्कि यहां का आचरण और व्यवहार भी उचित रहा है। यही कारण है कि पूरे विश्व में भारत का चिंतन एक अमूल्य निधि के रूप में स्थापित हुआ है।
भैयाजी का उद्बोधन
भैयाजी जोशी ने त्रिवेणी स्थित सुमेरगढ़ रिसॉर्ट में सुविचार अभियान की एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा:
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मनुष्य ने जीवनोपयोगी वस्तुओं की बजाय गैर-जरूरी चीजों में अपनी ऊर्जा खर्च कर दी है, जिससे प्रकृति के साथ स्पर्धा कर दुष्परिणाम भुगत रहा है।
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हमें प्रकृति के साथ स्पर्धा नहीं, बल्कि समन्वय की आवश्यकता है।
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आज शिक्षा उद्योग केंद्रित हो गई है, जबकि जीवनोपयोगी केंद्र कृषि की उपेक्षा हो रही है।
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भूमि के जलस्तर को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
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भूमि का संरक्षण और संवर्धन ही ग्राम विकास की संकल्पना को पूर्ण करेगा।
उन्होंने भागीरथ के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे उन्होंने गंगा जी को धरती पर लाकर भूमि को “सुजलाम्, सुफलाम्” बनाया, वैसे ही हमें भी जल और भूमि के संरक्षण के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।
संगोष्ठी और अन्य वक्ता
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा तुलसी के पौधे में जलार्पण कर किया गया।
संगोष्ठी में कई वक्ताओं ने विचार रखे:
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सरोज देवी फाउंडेशन के निदेशक तिलोकचंद छाबड़ा
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अपना संस्थान राजस्थान प्रदेश सचिव विनोद मेलाना
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फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के शांतनु राज सिन्हा
इस अवसर पर भैयाजी जोशी ने माकड़िया चारागाह और जोजवा में सुविचार अभियान के नव चरागाह विकास का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां
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डॉ. शंकरलाल माली ने अतिथि परिचय कराया।
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सुविचार अभियान गीत डॉ. परमेश्वर प्रसाद कुमावत ने प्रस्तुत किया।
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संचालन श्याम सिंह राठौड़ ने किया।
कार्यक्रम में स्वामी अक्षयानंद गिरि जी महाराज, संघ चालक डॉ. रमेश अग्रवाल, पर्यावरण गतिविधि के अखिल भारतीय संयोजक गोपाल आर्य, राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निंबाराम, चित्तौड़ प्रांत सह प्रचारक डॉ. धर्मेंद्र सिंह एवं प्रदेश के प्रमुख उद्योगपति उपस्थित रहे।