लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया विमोचन
अजमेर से नितिन मेहरा
अजमेर/नई दिल्ली। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा लिखित पुस्तक “सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि” का लोकार्पण उपराष्ट्रपति एन्क्लेव, नई दिल्ली में गरिमामय समारोह में संपन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के कर-कमलों से किया गया।
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष मिलिंद मराठे, उपराष्ट्रपति के सचिव अमित खरे सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
अटल जी के विचार आज भी राष्ट्र निर्माण की आधारशिला : उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आज भारत विश्व में एक शक्तिशाली और संभावनाशील राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और विचारों पर आधारित इस पुस्तक का लोकार्पण उनके लिए अत्यंत भावुक क्षण है, विशेषकर ऐसे समय में जब देश अटल जी की जन्म शताब्दी की ओर अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लंबे समय तक कार्य करने का उन्हें सौभाग्य मिला। उन्होंने अटल जी को “भारत का जॉन एफ. कैनेडी” बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व, दूरदृष्टि और सिद्धांतों ने देश को नई दिशा दी। अटल जी की सबसे बड़ी विशेषता उनके मूल्यों के प्रति अडिग प्रतिबद्धता थी—वे सौम्य और उदार थे, लेकिन विचारों में कभी समझौता नहीं करते थे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अटल जी का जीवन “राष्ट्र प्रथम, पार्टी बाद में और स्वयं सबसे अंत में” के आदर्श का सजीव उदाहरण था। उनके शासनकाल में आधारभूत ढांचे, राष्ट्रीय राजमार्गों, मेट्रो रेल और पोखरण परमाणु परीक्षण जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों ने विकसित भारत की मजबूत नींव रखी।
सनातन संस्कृति का सही अर्थ समझना आवश्यक : नितिन गडकरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सनातन, हिंदू और भारतीय संस्कृति के बीच कोई विरोधाभास नहीं है। यह सभी एक ही मूल भाव के प्रतीक हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल संदेश सर्वधर्म समभाव और विश्व कल्याण है।
गडकरी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति कभी संकीर्ण या विभाजनकारी नहीं रही, बल्कि न्याय, समभाव और समरसता की पक्षधर रही है। उन्होंने वासुदेव देवनानी द्वारा अटल जी के विचारों को पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत किए जाने के प्रयास को सराहनीय बताया।
अटल जी के जीवन को सनातन मूल्यों के आलोक में समझने का प्रयास : देवनानी
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह पुस्तक अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन, विचार और कृतित्व को सनातन संस्कृति के शाश्वत मूल्यों के आलोक में समझने का विनम्र प्रयास है। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन संघ संस्कारों, राष्ट्र प्रथम की भावना, संसदीय मर्यादाओं और सुशासन की अनुपम मिसाल रहा है।
देवनानी ने बताया कि 12 अध्यायों और 146 पृष्ठों में समाहित इस पुस्तक में अटल जी के व्यक्तित्व के विविध आयाम—संघ से वैचारिक जुड़ाव, संसदीय परंपराएं, विदेश नीति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान—का विस्तार से वर्णन किया गया है।
उन्होंने अपने शिक्षा मंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि पाठ्यक्रमों में भारतीय दृष्टिकोण को सशक्त करने के लिए इतिहास लेखन में आवश्यक परिवर्तन किए गए, जिससे नई पीढ़ी को भारतीय स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म से जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम के अंत में वासुदेव देवनानी ने सभी अतिथियों, गणमान्यजनों एवं प्रभात प्रकाशन का आभार व्यक्त किया। समारोह का संचालन प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार ने किया, जबकि निदेशक पीयूष कुमार ने उपराष्ट्रपति एवं मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए।