लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक)।
जैन समाज में चल रहे पर्युषण पर्व के दौरान शनिवार को तीसरे दिन क्षेत्रभर में आर्जव धर्म की पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई। सुन्थड़ा स्थित सुखोदय तीर्थ में दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।
आर्जव धर्म का महत्व
सुखोदय तीर्थ प्रबंध कमेटी अध्यक्ष महावीर पराणा एवं महामंत्री अजय जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व जैन समाज का सबसे बड़ा महापर्व है।
आर्जव धर्म का अर्थ है – ईमानदारी, सरलता और सीधापन।
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मन, वचन और कर्म से कपट या छल न करना।
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इसका पालन करने से मन स्थिर होता है, पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को सुख की प्राप्ति होती है।
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आर्जव धर्म व्यक्ति की विश्वसनीयता को बढ़ाता है और उसे आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

आर्जव धर्म का अभ्यास कैसे करें?
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सरलता अपनाएँ – मन, वचन और कर्म से सीधापन रखें।
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मायाचार का त्याग करें – छल, कपट, लालच और मोह-माया से दूर रहें।
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सच्चाई व्यक्त करें – मन में जो विचार हों, उन्हें वैसा ही वचन और कर्म से प्रकट करें।
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आत्मा की ओर ध्यान दें – आत्मज्ञान से सरल स्वभाव में स्थित हों।
धार्मिक आयोजन
पूजा-अर्चना का कार्यक्रम मंगलाष्टक से आरंभ हुआ। इसके बाद नित्य अभिषेक और शांति धारा संपन्न हुई।
श्रद्धालुओं ने क्रमशः –
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देवशास्त्र पूजा
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मूलनायक भगवान
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सोलह भावना
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नंदीश्वर दीप
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चौबीस भगवान
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दशलक्षण पूजा
का आयोजन किया।
शाम 7:30 बजे भक्तामर दीपार्चना के साथ धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए।