सत्संग भवन में 627 वा लंगर लगाया गया

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

विजय कपूर की रिपोर्ट
श्रीगंगानगर। श्री गुरु अर्जुन दास सत्संग भवन के संस्थापक एवं श्री रूद्र हनुमान सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गुरु अर्जुन दास जी द्वारा माघ शुक्ल पक्ष छठ को अपने स्वर्गीय पिताजी व समिति के राष्ट्रीय महासचिव चानन राम छाबड़ा की प्रथम पुण्यतिथि पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई और उनके द्वारा किए गए अविस्मरणीय सेवा कार्यो को याद किया गया और कुंभ में जो घटनाएं हुई उस में जो जीव संसार छोड़ गए उसके लिए 2: मिनट का मोन रखा ईश्वर से प्रार्थना की अपने चरणों में स्थान दें परिवार को दुख सहने की शक्ति प्रदान करें और सत्संग भवन में 627 वा लंगर लगाया गया। लंगर में केसर युक्त दूध केसर मेवे युक्त खीर, सोहन पापड़ी, मावा बर्फी, खस्ता तिलपट्टी,केले सेव फल के प्रसाद का श्री रुद्र हनुमान जी को भोग लगाकर वितरण किया गया। समिति द्वारा सेवाएं श्री गुरु अर्जुन दास, हुकुम देवी, संगठन मंत्री सतपाल कोर, अनुज मल्होत्रा, पंडित नरेश शर्मा, आशा रानी, सुभाष छाबड़ा, राजेश अंगी, एम डी सतीश, राजरानी, दिया, खुशी, निशा, मीकीं नवनीत मलोट, साहिल, देवेंद्र, संजू, जगतार सिंह, सिद्धू, पूनम,महेंद्र भटेजा व अन्य सदस्यों द्वारा दी गई। सभी ने तन मन से सेवा दी।श्री गुरु अर्जुन दास जी महाराज द्वारा बसंत पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए इसके बारे में बताया गया कि”हिंदू धर्म से जुडा़ हर त्योहार यदि आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है तो उसके अंदर वैज्ञानिक आधार भी समाहित होता है।

हर त्योहार हमें प्रकृति से नजदिकीयाँ बढ़ाने का संदेश देता हैं। इसी प्रकार बसंत पंचमी का अगर धार्मिक महत्व है तो इसका वैज्ञानिक महत्व भी कुछ कम नहीं है। हमारे मुनी ऋषि ने कितनी वैज्ञानिकता के साथ हर त्योहार को धार्मिक बना दिया।बसंत का अर्थ होता है सभी ऋतुओं का राजा। यह बसंत महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाने वाला त्योहार है, इस समय प्रकृति अपनी पूर्ण सौंदर्य पर होती है हर तरफ़ फसलें लहलहाती है जिसे देखकर किसान का मन रूपी मयूर नाचने लगता है. पूरे वातावरण में एक अजीब सी मदहोशी छाई रहती है। प्रकृति पूर्ण सौंदर्य करके अपने पूरे ऊरूज पर रहती है, भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में स्वंय कहा है कि ऋतुओं में मैं बसंत हूँ। यह वह समय होता है जब प्रकृति अपने पंच तत्व को पुरी तरह निखारने के लिए तैयार होती है।प्रकृति में चारों तरफ़ पीला रंग बिखर जाता है, खेतों में गदराई सरसों और मटर के फूल अपनी बाहें फैलाए रहें हैं। बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना भी की जाती है।”

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