लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी सुशासन की दिशा में लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने अभियोजन स्वीकृति, धारा 17-ए और विभागीय जांच से जुड़े 50 से अधिक प्रकरणों का निस्तारण किया है।
मुख्यमंत्री ने निजी व्यक्तियों को अवैध लाभ पहुंचाने के आरोपों में तत्कालीन उपखंड अधिकारी सहित सार्वजनिक निर्माण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के दो अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति दी है।
मण्डी समिति के सचिव को सेवा से हटाया
न्यायालय से दोषसिद्ध होने के आधार पर कृषि उपज मण्डी समिति के तत्कालीन सचिव को राज्य सेवा से पदच्युत किया गया है। वहीं लगातार लंबी अनुपस्थिति के कारण एक अन्य अधिकारी को भी राजकीय सेवा से हटाया गया।
इसके अलावा पद के दुरुपयोग, अनियमित भुगतान और राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोप में तत्कालीन विकास अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच और अनुसंधान को मंजूरी दी गई है।
27 अधिकारियों की वेतन वृद्धियां रोकी
मुख्यमंत्री ने एक भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी के खिलाफ दो प्रकरणों में संघ लोक सेवा आयोग के परामर्श से दंड की मात्रा बढ़ाने का अनुमोदन किया। साथ ही राज्य सेवा के 27 अधिकारियों को गंभीर आरोपों में दो से चार वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने की सजा दी गई।
सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने का निर्णय
मुख्यमंत्री ने सेवानिवृत्त अधिकारियों के पांच मामलों में पेंशन रोकने का अनुमोदन किया, जबकि अन्य नौ मामलों में जांच निष्कर्षों को मंजूरी देते हुए प्रकरण राज्यपाल को भेजे गए।
इसके अलावा अधिकारियों की अपील से जुड़े पांच मामलों में से चार अपीलें खारिज कर दी गईं, जबकि एक मामले में दंड की मात्रा कम की गई। वहीं कुछ मामलों में विभागीय जांच के आदेश, अभियोजन की मनाही और दोषमुक्ति के निर्णय भी किए गए।
राज्य सरकार का कहना है कि जनहित के कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
