लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सवाई माधोपुर।
मेडिकल कॉलेज सवाई माधोपर में बुधवार को आयोजित कैडेवरिक ओथ सेरेमनी भावनाओं और चिकित्सा शिक्षा के मूल सार को समझने वाला पल साबित हुई। एनाटॉमी विभाग द्वारा आयोजित इस समारोह में प्रथम वर्ष के छात्रों ने अध्ययन के लिए मिले दान किए गए शव को ‘पहले गुरु’ के रूप में सम्मान देने की शपथ ली।
इस संस्कार को चिकित्सा शिक्षा की शुरुआत में सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, क्योंकि इसके जरिए छात्रों में संवेदनशीलता, करुणा और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। छात्रों ने शरीर दान करने वाले दिवंगत व्यक्ति को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने मृत्यु के बाद भी चिकित्सा शिक्षा को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया।
एनाटॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा सैनी ने कहा कि कैडेवर का प्रत्येक अंग और संरचना छात्रों को भविष्य में बेहतर डॉक्टर बनने में सहायक होगी। उन्होंने बताया कि अब छात्र डमी से नहीं, बल्कि वास्तविक प्रैक्टिकल से सीखकर चिकित्सा ज्ञान को और मजबूत करेंगे।
सभी छात्रों ने सामूहिक शपथ लेते हुए कहा कि वे अध्ययन के दौरान गरिमा, संवेदनशीलता और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखेंगे, किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता नहीं दिखाएंगे और अर्जित ज्ञान का उपयोग मरीजों की भलाई के लिए करेंगे। छात्रों ने शरीर दान करने वाले दिवंगत व्यक्ति और उनके परिवार के प्रति आभार भी व्यक्त किया।