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छात्रवृति में देरी या तकनीकी समस्या के त्वरित समाधान के लिए संस्था प्रधान और विभागीय अधिकारी करें बेहतर समन्वय से काम – बचनेश अग्रवाल संयुक्त शासन सचिव

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

जयपुर,। (आर एन सांवरिया) निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव बचनेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा छात्र-छात्राओं को तय समयावधि में छात्रवृति उपलब्ध कराने की है। इसमें होने वाले विलंब या समस्या के समाधान के लिए संस्था प्रधान और विभागीय अधिकारी बेहतर समन्वय के साथ काम कर छात्र-छात्राओं को राहत पहुंचाएं। उन्होंने कहा इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अग्रवाल ने शुक्रवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मुख्यालय अंबेडकर भवन के सभागार में जिले के लगभग 50 सरकारी और निजी काॅलेजों के प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के साथ अहम बैठक कर छात्रवृति प्रक्रिया को आसान बनाने और छात्र-छात्राओं को प्रक्रिया समझाने और उचित परामर्श के निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान या विद्यार्थी स्तर से समय पर आवेदन विभाग को अग्रेषित नहीं किए जाने, विद्यार्थियों द्वारा संस्थान में बायोमैट्रिक नहीं किए जाने, विद्यार्थी द्वारा समय पर आक्षेप पूर्ति नहीं किए जाने संबंधी समस्याओं को सुना और अधिकरियों को इनके त्वरित समाधान के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव ने कहा समस्त संस्था प्रभारी संस्थान स्तर पर छात्रवृत्ति संबंधी कार्मिकों द्वारा प्रतिदिन निस्तारण की नियमित रूप से माॅनिटरिंग करें तथा एक कलैंडर तैयार कर छात्रवृत्ति का निस्तारण करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के आवेदनों पर लगने वाले आक्षेपों के निस्तारण के संबंध में एक एसओपी बनाई जाए तथा जिन विद्यार्थियों द्वारा समय पर आक्षेप पूर्ति नहीं की जा रही है या बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई जा रही है उनको व्हाट्सएप, दूरभाष या नोटिस चस्पा कर शीघ्र आक्षेप पूर्ति करवाएं।

अग्रवाल ने संस्थानों को संस्थान छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी का नाम, मोबाइल नम्बर तथा नोडल अधिकारी द्वारा छात्रवृत्ति आवेदनों का निस्तारण करने का समय नोटिस पर चस्पा किए जाने तथा इसकी प्रतिलिपि विभाग को प्रेषित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय जिला अधिकारी प्रत्येक माह अधिक पेंडेंसी वाले शिक्षण संस्थानों के साथ मीटिंग कर पेंडेंसी की समीक्षा करें तथा प्रतिमाह रिपोर्ट निदेशालय को प्रेषित करें।

निदेशक ने विभागीय जिला अधिकारियों द्वारा संस्थानों के औचक निरीक्षण करने तथा अनियमितता बरतने वाली संस्थानों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही लाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बायोमैट्रिक ओथेन्टिकेशन के लिए यूडीआईडी द्वारा पंजीकृत एल-1 डिवाइस इस्तेमाल करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान स्तर पर विद्यार्थियों के आवेदन जांच किए जाने दो कर्मचारियों के नियोजन के साथ पोर्टल पर संस्थान या विद्यार्थियों को बायोमैट्रिक आथेन्टिकेशन या उपस्थिति के लिए फेस रिकाॅगनेशन की सुविधा भी उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थान स्तर पर आ रही तकनीकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए निदेशालय की तकनीकी टीम प्रत्येक माह में दो दिवस शिक्षण संस्थानों की तकनीकी समस्याओं का समाधान भी करे।

इस अवसर पर अतिरिक्त निदेशक (छात्रवृत्ति) अशोक जांगिड़, संयुक्त निदेशक (आईटी) अमर सिंह मीणा, संयुक्त निदेशक बीपी चंदेल, उप निदेशक ओपी राहड, जितेन्द्र सेठी सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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