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अनुशासन और मुस्तैदी से ही बनती है पुलिस की असली पहचान: डीजीपी राजीव कुमार शर्मा

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जयपुर(  रूपनारायण सांवरिया)। पाँचवीं बटालियन आरएसी परिसर में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह में महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने पुलिस बल के जवानों और अधिकारियों को अनुशासन, मुस्तैदी और पेशेवर दक्षता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि पुलिस की वास्तविक पहचान उसके व्यवहार, वर्दी, और कार्य के प्रति तत्परता से बनती है।

डीजीपी शर्मा ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ड्यूटी चाहे किसी वीआईपी सुरक्षा की हो, जेल की हो या कानून-व्यवस्था की—हर परिस्थिति में पुलिसकर्मियों को पूर्ण तैयारी और अनुशासन के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जवानों के टर्नआउट, चुस्ती-फुर्ती और मौके पर उनकी प्रतिक्रिया ही उनकी पेशेवर छवि को दर्शाती है।

315 उत्कृष्ट पुलिसकर्मियों का सम्मान

समारोह में कुल 315 पुलिसकर्मियों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

  • 49 कार्मिकों को डीजीपी डिस्क एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
  • 149 कार्मिकों को अति उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया।
  • 117 कार्मिकों को उत्कृष्ट सेवा पदक प्रदान किए गए।

इस अवसर पर संजय अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने पुलिस बल के समर्पण और कार्यकुशलता की सराहना की।

प्रोफेशनल दक्षता और प्रशिक्षण पर जोर

डीजीपी ने कहा कि लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी के दौरान उपकरणों के सही उपयोग और नियमित अभ्यास से ही बेहतर प्रदर्शन संभव है। उन्होंने जवानों से आह्वान किया कि जहां भी कमी महसूस हो, उसे निरंतर प्रशिक्षण और समर्पण से दूर करें।

सम्मान से बढ़ता है मनोबल

समारोह के अंत में अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के सम्मान कार्यक्रम पुलिसकर्मियों के मनोबल को बढ़ाते हैं और उन्हें भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।

डीजीपी शर्मा ने कहा कि यह सम्मान केवल पदक नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों की मेहनत और समर्पण की पहचान है, जो पूरे संगठन के लिए प्रेरणा का कार्य करता है।

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