लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
लोकगीतों की जगह मशीनों की आवाज ने ली
गंगधार (झालावाड़)।
रिपोर्ट: सुनील निगम, लोकटुडे
समय के साथ आधुनिक तकनीक ने ग्रामीण जीवन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। कभी गांवों की सांस्कृतिक पहचान रही हाथ से चलने वाली घट्टी (चक्की) अब लगभग इतिहास बन चुकी है। एक समय था जब सूर्योदय से पहले गांवों के घरों में महिलाएं घट्टी पर गेहूं पीसते हुए लोकगीत गाया करती थीं। उन मधुर स्वरों से पूरा गांव भक्तिमय और सांस्कृतिक वातावरण में डूब जाता था।
सुबह की पहली किरण के साथ गांव की गलियों में घट्टी की “घर्र-घर्र” आवाज और महिलाओं के लोकगीतों की गूंज सुनाई देती थी। ये गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं थे, बल्कि इनमें लोकजीवन, पारिवारिक संस्कार, धार्मिक आस्था, सुख-दुख और सामाजिक परंपराओं की झलक भी दिखाई देती थी। काम के साथ गीत गाने की यह परंपरा महिलाओं के बीच आपसी मेलजोल और सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूत करती थी।
आधुनिकता ने बदल दी गांवों की तस्वीर
बदलते समय के साथ हाथ से चलने वाली घट्टियों की जगह अब इलेक्ट्रिक आटा चक्कियों और फ्लोर मिलों ने ले ली है। पहले जहां गेहूं पीसने में काफी समय और श्रम लगता था, वहीं अब कुछ ही मिनटों में आटा तैयार हो जाता है। आधुनिक तकनीक ने लोगों का समय और मेहनत तो बचाई है, लेकिन इसके साथ ही ग्रामीण संस्कृति की एक महत्वपूर्ण परंपरा भी धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है।
नई पीढ़ी से दूर हो रही लोक विरासत
ग्रामीण बुजुर्ग बताते हैं कि आज की पीढ़ी ने न तो कभी घट्टी चलाई है और न ही वे लोकगीत सुने हैं, जो कभी गांवों की सुबह की पहचान हुआ करते थे। नई पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत से दूरी भी बढ़ती जा रही है।
संरक्षण की जरूरत
विशेषज्ञों और ग्रामीणों का मानना है कि तकनीक का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इसके साथ लोक परंपराओं का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। लोकगीतों, पारंपरिक जीवनशैली और ग्रामीण संस्कृति को केवल यादों तक सीमित न रहने देकर उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास किए जाने चाहिए। सांस्कृतिक आयोजन, लोकगीत प्रतियोगिताएं और ग्रामीण विरासत से जुड़े कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ग्रामीण जीवन की पहचान रही घट्टी भले ही आज घरों से गायब हो गई हो, लेकिन उससे जुड़ी लोकसंस्कृति, आत्मीयता और सामाजिक समरसता की यादें आज भी बुजुर्गों के मन में जीवंत हैं।
