लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
ग्रामीण सेवा शिविर बना मिसाल
रियांबड़ी (नागौर)। नागौर जिले के रियांबड़ी उपखंड क्षेत्र की झींटिया ग्राम पंचायत में आयोजित फॉलोअप ग्रामीण सेवा शिविर उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब आजादी के करीब 75 वर्ष बाद एक वर्षों पुराने भूमि बंटवारे के विवाद का आपसी सहमति से समाधान कराया गया। प्रशासन की मौजूदगी में हुए इस समझौते से संबंधित परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने राज्य सरकार व प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
राज्य सरकार के निर्देशानुसार शुक्रवार को झींटिया ग्राम पंचायत के आईटी सेवा केंद्र परिसर में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और अनेक प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण किया। शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि राजेंद्र पुत्र भंवरूराम माली, देवाराम पुत्र भंवरूराम माली, मोहनराम पुत्र ढगलाराम माली तथा रामकरण पुत्र ढगलाराम माली के बीच लंबे समय से लंबित भूमि बंटवारे के मामले का आपसी सहमति से समाधान रहा। अधिकारियों की उपस्थिति में बंटवारे की प्रक्रिया पूरी होने पर परिजनों ने राहत की सांस ली।
ग्राम विकास अधिकारी रमेशचंद मीणा ने बताया कि शिविर के दौरान 5 पट्टों का वितरण, 3 भूमि बंटवारे, 15 नामांतरण, 11 शुद्धिकरण, 2 जॉब कार्ड, 10 जाति प्रमाण पत्र, 5 मूल निवास प्रमाण पत्र, 4 जन्म प्रमाण पत्र तथा 1 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। परिवहन विभाग ने 10 नागरिकों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाए, जबकि करीब 250 ग्रामीणों को जी-रामजी योजना की जानकारी देकर लाभान्वित किया गया।
शिविर के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र और शिव बगीची परिसर में पौधरोपण भी किया गया। अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ग्रामीणों से अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने श्मशान भूमि के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइनों को हटाने तथा जल जीवन मिशन के अंतर्गत नहर आधारित पेयजल योजना से झींटिया ग्राम पंचायत को जोड़ने की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा।
शिविर में नायब तहसीलदार एवं शिविर प्रभारी प्रेमकुमार ढेबाना, सहायक विकास अधिकारी जगदीश प्रसाद माली, प्रशासक हरसुखराम ककड़ावा, ग्राम विकास अधिकारी रमेशचंद मीणा, पटवारी जोराराम चौधरी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी शिविर में भाग लिया।
ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से लंबित विवाद का शांतिपूर्ण समाधान न केवल संबंधित परिवारों के लिए राहत लेकर आया, बल्कि यह प्रशासन और ग्रामीणों के आपसी विश्वास एवं संवाद का भी प्रेरक उदाहरण बन गया।:::












































