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50 साल से न्याय की प्रतीक्षा : आखिर कब मिलेगा दलित किसान परिवार को हक ?

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 

टोंक/पीपलू |  टोंक जिले की पीपलू तहसील के ग्राम नवरंगपुरा में अनुसूचित जाति के किसान बद्रीलाल बैरवा का परिवार पिछले लगभग 50 वर्षों से अपनी आवंटित कृषि भूमि पर खातेदारी अधिकार और कब्जा दिलाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है।

मामला वर्ष 1975 में आवंटित 5 बीघा 6 बीसवा भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है, जो वर्तमान में खसरा नंबर 88/3 के रूप में दर्ज है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों द्वारा भूमि पर अतिक्रमण कर लिया गया है और राजस्व रिकॉर्ड में आज भी यह भूमि गैर-खातेदारी दर्ज है।

उच्च स्तर से आदेश, लेकिन जमीनी कार्रवाई शून्य

पीड़ित पक्ष का कहना है कि मामले में कई बार उच्च स्तर से निर्देश जारी होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इनमें राजस्व विभाग, जन अभियोग निराकरण समिति, राजस्व मंडल अजमेर, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तथा अन्य स्तरों से दिए गए निर्देश शामिल बताए गए हैं।

परिवार का आरोप है कि आदेशों के बावजूद न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही खातेदारी दर्ज की गई।

तहसीलदार पर आरोप, मामला विवादों में

बद्रीलाल बैरवा ने आरोप लगाया है कि खातेदारी की मांग उठाने पर तहसीलदार द्वारा उनके खिलाफ आवंटन निरस्तीकरण की कार्यवाही शुरू की गई, जिसे वे गलत बताते हैं।

मामले में अतिरिक्त जिला कलेक्टर मालपुरा द्वारा 5 फरवरी 2025 को दिए गए निर्णय में पीड़ित के पक्ष में फैसला होने का भी दावा किया गया है, बावजूद इसके जमीन पर कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

पीड़ित परिवार का यह भी कहना है कि अनुसूचित जाति की भूमि पर कब्जा हटाने के लिए निर्धारित नियमों के बावजूद समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

नई कलेक्टर से उम्मीद

करीब 50 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा यह परिवार अब नई जिला कलेक्टर टीना डाबी से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। परिवार का कहना है कि अब देखना यह है कि वर्षों पुराने आदेश फाइलों तक सीमित रहते हैं या जमीन पर भी अमल में आते हैं।

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