लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
करधनी। ( विष्णु स्वामी ) जय दुर्गा ज्योतिष शोध संस्थान के संस्थापक ज्योतिष मर्मज्ञ पंडित बाबूलाल शर्मा के अनुसार
नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे साल में चार बार मनाया जाता है, लेकिन मुख्य रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। 2024 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्टूबर 2024 से होगी और इसका समापन 11 अक्टूबर 2024 को होगा। यह नौ दिनों तक चलने वाला एक धार्मिक पर्व है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि का अर्थ होता है “नौ रातें”। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जो शक्ति और शक्ति के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, नारी शक्ति का सम्मान, और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए मनाया जाता है।
नौ देवियों के रूप और दिन
इस बार तृतीया तिथि की वृद्धि हुई है।
- प्रथम दिन (3 अक्टूबर 2024) – शैलपुत्री पूजा
- द्वितीय दिन (4 अक्टूबर 2024) – ब्रह्मचारिणी पूजा
- तृतीय दिन (5 अक्टूबर 2024) – चंद्रघंटा पूजा
- चतुर्थ दिन (6 अक्टूबर 2024) – कूष्मांडा पूजा
- पंचम दिन (7 अक्टूबर 2024) – स्कंदमाता पूजा
- षष्ठ दिन (8 अक्टूबर 2024) – कात्यायनी पूजा
- सप्तम दिन (9 अक्टूबर 2024) – कालरात्रि पूजा
- अष्टम दिन (10 अक्टूबर 2024) – महागौरी पूजा
- नवम दिन (11 अक्टूबर 2024) – सिद्धिदात्री पूजा
नवरात्रि 2024 के शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना (घट स्थापना):
देवी पुराण के अनुसार घट स्थापना द्विस्वभाव लग्न में होनी चाहिए |
शुभ समय: 3 अक्टूबर 2024
कन्या लग्न व शुभ का चौघड़िया
प्रातः 6:23 से 7:36 तक
अभिजित मुहूर्त प्रातः 11:52 से दोपहर 12:38 तक
(चंचल,लाभ,अमृत )चौघड़िया प्रातः10:46 से दोपहर 3:12 तक
अष्टमी पूजा (महाष्टमी):
शुभ समय: 10 अक्टूबर 2024
नवमी पूजा (महानवमी):
शुभ समय: 11 अक्टूबर 2024
कलश स्थापना विधि
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसे घर के पूजा स्थल पर विधिपूर्वक स्थापित किया जाता है। इसके लिए मिट्टी का पात्र, जौ, जल, आम के पत्ते, नारियल, और लाल कपड़ा आदि की आवश्यकता होती है। कलश को देवी दुर्गा का प्रतीक माना जाता है और इसे पूजा के दौरान विशेष रूप से सम्मानित किया जाता है।
उपवास और आराधना
नवरात्रि के दौरान भक्तगण उपवास रखते हैं और दिन-रात मां दुर्गा की उपासना में लीन रहते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रत, भजन, कीर्तन और देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। उपवास के दौरान सात्विक आहार का सेवन किया जाता है।
नवमी और कन्या पूजन
नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन 9 कन्याओं को देवी दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है। कन्या पूजन के माध्यम से नारी शक्ति का सम्मान किया जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।
विजयदशमी (दशहरा)
नवरात्रि के बाद दसवें दिन विजयदशमी का पर्व आता है, जिसे दशहरा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान राम द्वारा रावण का वध किया गया था, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
इस प्रकार, नवरात्रि का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन में अनुशासन, आत्म-संयम, और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देने वाला पर्व भी है। 2024 की नवरात्रि में मां दुर्गा की कृपा से हर कोई सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त कर सकता है।
नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा का आगमन नौका (नाव) पर होगा। यह ज्योतिषीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण संकेत है।
नौका पर माँ दुर्गा का आगमन शुभ माना जाता है, जो यह दर्शाता है कि प्राकृतिक आपदाओं में कमी होगी, खेती-बाड़ी और जल से संबंधित कार्यों में उन्नति होगी। साथ ही, यह समृद्धि, शांति और सुखद जीवन का संकेत देता है।
माँ दुर्गा का गमन (वापसी) इस वर्ष हाथी पर होगा, जो वर्षा, समृद्धि और हरियाली का प्रतीक है।
