सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक: कब मिलेगा स्थायी समाधान?

0
68
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

समदड़ी ।
समदड़ी कस्बे में आवारा पशुओं की समस्या लगातार गंभीर रूप लेती जा रही है। सड़कों पर झुंड के साथ घूमते पशुओं के कारण हादसे आम हो चुके हैं। दो दिन पहले बालोतरा शहर में आवारा सांड की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत ने एक बार फिर इस समस्या की गंभीरता को उजागर कर दिया। समदड़ी में भी कई लोग घायल हो चुके हैं, और कई बार तो हादसे जानलेवा साबित होते हैं।

पूर्व में ग्राम पंचायत द्वारा आवारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में भेजा गया था, लेकिन गौशाला संचालकों की लापरवाही से ये पशु फिर से सड़कों पर लौट आते हैं। अब जबकि समदड़ी नगर पालिका बन चुकी है, नागरिकों को उम्मीद थी कि समस्या का स्थायी समाधान होगा, लेकिन अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। परिणामस्वरूप आवारा पशु मुख्य सड़कों पर बैठ जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल हादसे होने पर कार्रवाई करने से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए दीर्घकालिक योजना बनाकर गौशाला संचालकों और पशु मालिकों को पाबंद करना होगा। दुधारू पशु दूध निकालने के बाद खुले छोड़ दिए जाते हैं, जो झुंड बनाकर सड़कों पर घूमते हैं। कभी-कभी सांड आपस में लड़ते हुए वाहन चालकों को घायल कर देते हैं। इसलिए आवश्यक है कि:

स्थायी समाधान के लिए उठाए जाएं ये कदम:

  • नियमित पशु पकड़ने की कार्रवाई: नगर पालिका को हादसों के बाद नहीं, बल्कि नियमित अभियान चलाकर आवारा पशुओं को पकड़ना चाहिए और उन्हें सुरक्षित स्थानों या गौशालाओं में भेजना चाहिए।

  • गौशालाओं का विस्तार और प्रबंधन: समदड़ी व आसपास की गौशालाओं की क्षमता बढ़ाई जाए। बेहतर देखभाल और प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सरकारी तंत्र के साथ सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाए।

  • पशु मालिकों पर जुर्माना: जो लोग अपने पशुओं को खुले में छोड़ते हैं, उनके खिलाफ सख्त जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इससे जिम्मेदारी की भावना जागेगी और लोग अपने पशुओं को सुरक्षित रखेंगे।

  • जन जागरूकता अभियान: नागरिकों को समझाना होगा कि खुले में छोड़ने से पशुओं की संख्या बढ़ती है और हादसों का खतरा भी। साथ ही, उन्हें यह भी बताया जाए कि आवारा पशुओं को सड़क पर भोजन देने से समस्या और विकट हो सकती है।

“समस्या सिर्फ प्रशासन की नहीं, सबकी है”

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मुद्दा केवल नगर पालिका या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के हर वर्ग, हर व्यक्ति को मिलकर इस समस्या का समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना होगा। जब तक समदड़ी व आसपास के नागरिक, गौशाला संचालक और प्रशासन मिलकर ठोस कदम नहीं उठाएँगे, तब तक सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक बना रहेगा।

समदड़ी की सड़कों पर चलने वाले हर नागरिक के लिए यह एक गंभीर चिंता का विषय है। समय रहते उचित कदम उठाना आवश्यक है ताकि भविष्य में बड़े हादसों से बचा जा सके और लोगों का जीवन सुरक्षित रह सके।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here