लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
भीलवाड़ा। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स (ICMM) के प्रेसिडेंट और सीईओ रोहितेश धवन ने हिन्दुस्तान जिंक की सिंदेसर खुर्द खदान का दौरा किया। यह दौरा उस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद हुआ है जिसमें हिन्दुस्तान जिंक पहली भारतीय कंपनी बनकर आईसीएमएम में शामिल हुई। साथ में हिन्दुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा और वरिष्ठ नेतृत्व टीम भी मौजूद रही।
धवन ने खदान का निरीक्षण करते हुए कंपनी की तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और कॉर्पोरेट प्रशासन) में अग्रणी भूमिका की सराहना की। सिंदेसर खुर्द दुनिया की चौथी सबसे बड़ी चांदी उत्पादक खदान है, जहाँ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्थायी खनन को लागू किया जा रहा है।
धवन ने कहा कि “भारत वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और हिन्दुस्तान जिंक का सस्टेनेबिलिटी के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है।” उन्होंने कंपनी द्वारा अपनाई गई पर्यावरणीय जिम्मेदारी और हरित भविष्य की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।
हिन्दुस्तान जिंक ने विज्ञान-आधारित लक्ष्यों के साथ 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का संकल्प लिया है। 2024 में कंपनी को लगातार दूसरे वर्ष दुनिया की सबसे सस्टेनेबल मेटल्स और माइनिंग कंपनी का दर्जा मिला। वित्तीय वर्ष 2025 में कंपनी ने 2020 की तुलना में अपने जीएचजी उत्सर्जन की तीव्रता में 15% की कमी की है।
यह दौरा न केवल कंपनी की वैश्विक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि भारत में जिम्मेदार और सतत खनन का एक नया मानक स्थापित करता है।






















































