लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक)। उपखंड क्षेत्र के सुखोदय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में पर्यूषण पर्व के दसवें दिन वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक और उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म श्रद्धा के साथ मनाया गया।
दशलक्षण पर्व का महत्व
प्रबंध कमेटी अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा और सह-कोषाध्यक्ष मनोज जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व जैन समाज का सबसे बड़ा पर्व है।
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जैन धर्म में उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन करने से व्यक्ति अन्य नौ दशलक्षण धर्मों को भी स्वतः पूर्ण कर पाता है, जिससे पापों से मुक्ति मिलती है।
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ब्रह्मचर्य को सभी दशलक्षण धर्मों का सार माना जाता है। इसके पालन से व्यक्ति क्षमा, मार्दव और अन्य गुणों को प्राप्त करता है, जो आंतरिक शांति और सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाते हैं।
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यह पर्व युवाओं के चरित्र निर्माण में सहायक होता है और उन्हें नैतिकता, संयम और सच्चाई सिखाता है।

निर्वाण दिवस की विधियाँ
वासुपूज्य भगवान ने सत्य और अहिंसा का उपदेश दिया और भाद्रपद शुक्ला चतुर्दशी को निर्वाण प्राप्त किया।
समारोह में किए गए अनुष्ठानों में शामिल थे:
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मंगलाष्टक से प्रारंभ
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नित्य अभिषेक और शांतिधारा
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देवशास्त्र पूजा, मुलनाक भगवान, सोलहभावना, नंदीश्वरदीप, चौबीस भगवान और दशलक्षण पूजा
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वासुपूज्य भगवान की पूजा, निर्माण कांड बोलकर निर्वाण लाडू अर्पित किया गया
शाम की विशेष आराधना
शाम साढ़े 7 बजे भक्तामर दीपार्चना आयोजित की गई, जिसे भक्तामर मंडल उनियारा द्वारा सानंद संपन्न कराया गया।












































