कतार में दम तोड़ती बुजुर्गों की उम्मीद, लापरवाह कर्मचारी बेपरवाह

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

एमजीएच का हाल बेहाल, पीएमओ के बड़े-बड़े दावों की खोल रहा है पोल

भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) एक और सरकार बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए बेहतर सुविधाएं और व्यवस्थाएं योजनाएं चल रही है दूसरी ओर महात्मा गांधी अस्पताल में उपचार के लिए बुजुर्ग और दिव्यांग पर्ची काटने और चिकित्सक को दिखाने के लिए घंटो इंतजार करते नजर आ रहे हैं। जो प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ. अरुण गौड़ के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रहा है। अस्पताल प्रशासन ने इन वर्गों के लिए अलग से कतार की व्यवस्था कर रखी है बावजूद इसके जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही के कारण अन्य लोग इसमें खड़े होकर व्यवस्था बिगाडक़र बुजुर्गों और दिव्यांगों को परेशान करने पर तूले है।

सोमवार को तो दो दिन की छूट्टी के बार मरीजों की काफी भीड़ थी। ऐसे में हाल बेहाल थे। दरअसल, जिला अस्पताल होने के कारण सुबह 8 बजे से ही अस्पताल में पर्ची कटाने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों और महिलाओं के लिए अलग से काउंटर होने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में इन कतारों में सामान्य मरीज या उनके परिजन भी खड़े हो जाते हैं। इससे विशेष श्रेणी के लोगों को भी घंटों इंतजार करना पड़ता है, जो उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए अत्यंत कष्टदायक है।

सोमवार को जब मिडिया टीम वहां पहुंची तो हमीरगढ़ के एक बुजुर्ग ख्यालीलाल ने बताया कि वह शुगर व बीपी की दवा लिखवाने आए लेकिन उनकी लाइन में दूसरे खड़े हो गए है पर्ची लेने में परेशानी हो रही है। खड़े-खड़े पैर दुखने लग गए। कोई सुनने वाला नहीं है। दिव्यांगजनों को भी परेशानी अस्पताल में दिव्यांग व्यक्तियों को भी पर्ची के लिए परेशान होना पड़ रहा है। व्हीलचेयर व बैसाखी के साथ आउटडोर में कतार में लगकर पर्ची लेना उनके लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। देखा जाए तो यह स्थिति मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली है। अस्पताल प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों और विशेष व्यक्तियों के लिए बनी कतारों की निगरानी के लिए लगे कर्मचारियों को पाबंद किया जाना चाहिए। आम जनता को भी जागरूक होकर विशेष कतारों में खड़े नहीं होना चाहिए।

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