लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
विभिन्न किस्म तैयार कर सस्ती दर पर उपलब्ध करा रहे है सरसों का बीज
भरतपुर। सेवर स्थित सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा सरसों की कई उन्नत किस्म तैयार की गई है. इन किस्मों से जहां भरपूर पैदावार होगी, वहीं इनमें तेल की मात्रा भी अच्छी होगी. यह सरसों अनुसंधान निदेशालय किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है यहां विभिन्न किस्म तैयार करके किसानों को सस्ती दर पर सरसों का बीज उपलब्ध कराया जाता है .इसके अलावा उन्हें प्रशिक्षण देने एवं विभिन्न योजनाओं के बारे में अवगत कराया जाता है।
संस्थान के निदेशक डॉ. विजय वीर सिंह ने बताया कि हमारा फोकस केवल उत्पादन नहीं, बल्कि किसानों की व्यावसायिक स्थिरता, तेल गुणवत्ता, और जलवायु सहनशीलता है. यहां वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई 13 उन्नत किस्मों ने देश के 21 राज्यों में किसानों के खेतों में हरियाली और जीवन में समृद्धि ला दी है। बदलते मौसम, जल संकट और बढ़ती लागत के इस दौर में भरतपुर की सरसों किस्में उच्च उपज, बेहतर तेल प्रतिशत और टिकाऊ खेती का समाधान बनकर सामने आई है। यही कारण है कि आज भरतपुर को भारत की ‘सरसों राजधानी’ कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
सरसों अनुसंधान संस्थान की किस्मों की खेती राजस्थान, यूपी, एमपी, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, बिहार, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित 21 से अधिक राज्यों में की जा रही है। इन किस्मों की वजह से किसानों को उच्च उत्पादन, बेहतर बाजार मूल्य और आय में स्थायित्व मिल रहा है।
राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र की स्थापना 20 अक्टूबर, 1993 को ICAR द्वारा की गई। फरवरी, 2009 में इसका नाम बदलकर सरसों अनुसंधान निदेशालय कर दिया गया। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य किसानों को सरसों की नई नई किस्में तैयार कर कम लागत में दुगना मुनाफा दिलवाना..!

















































