एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” विषयक कार्यशाला आयोजित

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
योग, स्वास्थ्य और प्रकृति संरक्षण के समन्वय पर दिया बल

जयपुर। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी में गुरुवार को “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में योग, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और समग्र स्वास्थ्य में उनके योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्थापक चेयरमैन डॉ. एम. एल. स्वर्णकार तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. अचल गुलाटी थे। कार्यशाला की शुरुआत सामूहिक योग सत्र एवं वृक्षारोपण के साथ हुई।

प्रमुख वक्ताओं में डॉ. रीमा दादा (एम्स, एनाटॉमी विभाग), डॉ. आर. के. पुरी (दिल्ली), डॉ. संजय फडके (पुणे), डॉ. एन. डी. सोनी, तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा निदेशक डॉ. ईश्वर वी. बसवरेड्डी शामिल रहे। योग प्रशिक्षक मीनाक्षी दास ने संगीतमय योग का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि यह शरीर, मन, आत्मा और प्रकृति के बीच समन्वय स्थापित करने का माध्यम है। योग से न केवल कार्यकुशलता, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है, बल्कि यह सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यशाला के दौरान फैटी लिवर रोग में योग की उपयोगिता पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसका समन्वयन डॉ. विवेक आनंद सारस्वत ने किया। इस सत्र में लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. करण कुमार, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कासलीवाल और डायटिशियन डॉ. विनीता बंसल ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने माना कि योग क्रियाओं, संयमित दिनचर्या, संतुलित आहार एवं नियमित योगाभ्यास के माध्यम से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

इस कार्यशाला में 240 से अधिक फैकल्टी सदस्य एवं विद्यार्थियों ने पंजीकरण कर भाग लिया और योग की व्यावहारिक विधियों का अनुभव किया।
कार्यक्रम में डॉ. ए. के. शर्मा, डॉ. भावना सिंघल, डॉ. मधुसूदन तिवारी तथा डॉ. बुशरा फिज़ा भी उपस्थित रहे।

इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को एक स्वस्थ, संतुलित और प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

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