पारम्परिक रूप से मनाया गया मोहर्रम का पर्व

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कुचामन सिटी।( विमल पारीक वरिष्ठ संवाददाता )समानता इस्लाम धर्म के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मुस्लिम समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला मोहर्रम का पर्व ,बुधवार को कुचामन क्षेत्र में पारम्परिक रूप से अकीदत के साथ मनाया गया । मदरसा इस्लामिया सोसायटी के सदर मोहम्मद सलीम कुरैशी और सचिव मोहम्मद इकबाल भाटी ने बताया की हर साल की तरह कुचामन शहर में मोहर्रम के पर्व पर लुहारान, न्यारियान, पलटन गेट, घाटी कुआं, व्यापारी मोहल्ला और छीपा मोहल्ला की ओर से कुल 6 ताजिए निकाले गए। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद सभी ताजिये अपने अपने मकाम से ढोल ताशों की मातमी धुनों के साथ जुलूस के रूप में रवाना हुए और धान मंडी में आकर सभी ताजिए एक साथ हो गए । जुलूस में सबसे आगे अखाड़ा था जिसमें युवाओं ने विभिन्न करतब दिखाए । सोसायटी के कोषाध्यक्ष इस्माइल शाह और उपाध्यक्ष अब्दुल सत्तार बडगुजर ने बताया कि परम्परा के मुताबिक पलटन गेट क्षेत्र के ताजिये को कुचामन किले में सलामी के लिए ले जाया गया । गौरतलब है कि पूर्व में पलटन गेट क्षेत्र के ताजियों को कुचामन ठिकाने के राज परिवार की ओर से बनवाया जाता रहा और आजादी के बाद से यह जिम्मेदारी स्थानीय नगरीय निकाय ने संभाली हुई है। पुरानी धान मंडी से सभी 6 ताजियों को घाटी कुआ छीपा मोहल्ला से होते हुएशहर के मोती राम जी की कोठी स्थित कर्बला में ले जाकर सेराब किया गया ।

पुकिस व्यवस्था रही चाक-चौबंद

मोहर्रम के पर्व के मद्देनजर स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी मुस्तैद रहे और क्षेत्र में अतिरिक्त जाब्ते के साथ पुलिस ताजियों के रूट के मुताबिक व्यवस्थाएं संभालने में आगे रही । थाना प्रभारी सुरेश कुमार चौधरी ने दोपहर बाद से लेकर ताजियों के सेराब हो जाने तक खुद आगे रहकर मोर्चा संभाले रखा। बरसात के मौसम को देखते हुए इस बार धान मंडी क्षेत्र में दुकानों की छतों पर महिलाओं को जाने से रोका गया क्योंकि बरसात के कारण छतें गीली है और कोई हादसा ना हो जाए इसी की सावधानी रखते हुए पुलिस ने छतों पर महिलाओं और बच्चों को चढ़ने से रोका जिसका समर्थन ताजियों के जुलूस में शामिल कई लोगों ने भी किया । इससे पूर्व मंगलवार की रात को शहादत की रात के दौरान भी पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाएं में माकूल रही। मदरसा इस्लामिया सोसायटी के वसीम कलाल ने बताया की शहादत की रात के दौरान मन्नत के अनुसार सेहरे व चढ़ाए गए । रात्रि 12 बजे सभी छ ताजिये अपने अपने मकाम से जुलूस के साथ रवाना हुए। छीपा मोहल्ला, व्यापारी मोहल्ला, पलटन गेट, घाटी कुवा, लुहारिया बास व न्यारिया मोहल्ला से ताजिये रवाना हुए जो गोल प्याऊ होते हुए बुधवार सुबहचार बजे धान मंडी पहुंचें। यहाँ से फिर सभी ताजिये पुन अपने मुकाम की तरफ लौट गए । इस दौरान भारी तादाद में अकीकदतमंद मौजूद रहे।

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