लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
31 अगस्त से 2 सितंबर तक मुख्य मेला और बाबा की जात; 50 लाख रुपये की राशि तय, पहली बार गोली के जरिए हुआ चढ़ावे का फैसला
हलैना | विष्णु मित्तल
अरावली पर्वतमाला की श्रृंखलाओं के बीच बसे गांव जहाज स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र श्री कारिस देव बाबा मंदिर में बाबा के जयकारों के साथ कारिस देव बाबा मेले का शुभारंभ हो गया। मेले को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आने लगा है और दूर-दराज के क्षेत्रों से मेलार्थियों का पहुंचना भी शुरू हो गया है। मुख्य मेला 31 अगस्त से 2 सितंबर तक आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
श्री कारिस देव बाबा मेला कमेटी के अनुसार इस बार नगर निगम एवं नगर पालिका चुनावों को देखते हुए लागू चुनाव आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए मेले की धार्मिक गतिविधियों का शुभारंभ 28 अगस्त से कर दिया गया है। हालांकि, मुख्य मेला और बाबा की जात 31 अगस्त से 2 सितंबर तक होगी। मेले का आयोजन 28 सितंबर तक जारी रहने की जानकारी दी गई है।
50 लाख रुपये तय, पहली बार गोली से हुआ चढ़ावे का फैसला
इस बार कारिस देव बाबा मेले के चढ़ावे को लेकर मंदिर के गोठिया परिवारों के बीच काफी समय से विवाद और गुटबाजी की स्थिति बनी हुई थी। मंदिर से जुड़े परिवारों में तीन गुट बनने के बाद चढ़ावे की बोली को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी।
बाद में सभी पक्षों की सहमति से वर्ष 2026, 2027 और 2028 के लिए चढ़ावे की राशि 50-50 लाख रुपये निर्धारित की गई। इसके बाद खुली बोली लगाने के बजाय पहली बार गोली के माध्यम से चढ़ावे का फैसला किया गया।
गोठिया परिवार से जुड़े लखन सिंह एवं खुबीराम के अनुसार तीन गोलियां डाली गईं। इनमें वर्ष 2026 का चढ़ावा लखन गोठिया एवं दीपी गोठिया ग्रुप के नाम रहा। वर्ष 2027 का चढ़ावा खुबीराम गोठिया एवं शेरसिंह गोठिया के नाम तथा वर्ष 2028 का चढ़ावा रतिराम गोठिया के नाम रहने की जानकारी दी गई।
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार चढ़ावे से प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर के विकास और मेले की व्यवस्थाओं पर किया जाता है।
गुर्जर समाज के साथ सर्व समाज की आस्था का केंद्र
देव मेला कमेटी के सदस्य तोताराम प्रधान एवं प्रताप सिंह गुर्जर ने बताया कि गांव जहाज को श्री कारिस देव बाबा की जन्मभूमि माना जाता है। यह स्थल केवल गुर्जर समाज ही नहीं, बल्कि सर्व समाज के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
मंदिर परिसर में वर्ष में दो बार मेला आयोजित होता है, लेकिन भादो माह का मेला मुख्य माना जाता है। मान्यता के अनुसार भादो माह की वदी 4 को श्री कारिस देव बाबा का जन्म हुआ था, इसलिए इस अवसर पर आयोजित होने वाले मेले का विशेष धार्मिक महत्व है।
मेले में राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए तो कई रेल और अन्य परिवहन साधनों से बाबा के दर्शन के लिए जहाज पहुंचते हैं।
मेले में शुरू हुआ श्रद्धालुओं का आगमन
मंदिर के गोठिया लखन सिंह एवं खुबीराम ने बताया कि मुख्य मेला 31 अगस्त से 2 सितंबर तक रहेगा। हालांकि रक्षाबंधन पर्व से ही मेले का माहौल शुरू हो गया है और 28 सितंबर तक धार्मिक गतिविधियां चलेंगी।
श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। मेला कमेटी, ग्राम पंचायत और श्रद्धालुओं के सहयोग से मेलार्थियों के लिए पेयजल, भोजन, आवास, सुरक्षा, रोशनी और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं निःशुल्क उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।
प्रशासन ने किया मेला स्थल का निरीक्षण
मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने भी सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
वैर एएसपी प्रेरणा शेखावत, वैर उपखंड अधिकारी ऋतुराज शर्मा, भुसावर उपखंड अधिकारी राधेश्याम मीणा, भुसावर वृत्त पुलिस उपाधीक्षक नीरज भारद्वाज तथा ग्राम पंचायत हाथौड़ी के प्रशासक सरपंच फत्ते सिंह गुर्जर सहित अधिकारियों ने मेला स्थल का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने मंदिर परिसर, मेला स्थल, बल्लभगढ़-वैर वाया हाथौड़ी मार्ग, नगला जहाज जाने वाले रास्ते और सीता कुंड सहित विभिन्न स्थानों का जायजा लिया। इस दौरान सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा, शांति व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर मेला कमेटी एवं ग्राम पंचायत को आवश्यक निर्देश दिए गए।
मेला स्थल पर अस्थायी पुलिस चौकी, अतिरिक्त जाब्ता तैनात
मेले के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। थाना वैर, हलैना, भुसावर, बयाना और बल्लभगढ़ पुलिस चौकी के प्रभारियों को यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मेला स्थल पर अस्थायी पुलिस चौकी भी स्थापित की गई है। इसके अलावा भरतपुर से अतिरिक्त पुलिस जाब्ता बुलाकर तैनात किया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और मेला शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो।
चढ़ावे की बोली को लेकर पहली बार बदली प्रक्रिया
श्री कारिस देव बाबा मंदिर पर वर्ष में दो बार मेले का आयोजन होता है। मुख्य मेला भादो माह में आयोजित होता है और इस दौरान मंदिर के चढ़ावे की बोली लगाई जाती रही है। इस प्रक्रिया में मंदिर से जुड़े गोठिया परिवार ही भाग लेते हैं।
बताया गया कि पूर्व में चढ़ावे की बोली कभी 35 लाख रुपये से अधिक नहीं गई थी, लेकिन इस बार गोठिया परिवारों के बीच मतभेद और गुटबाजी के चलते मामला विवादित हो गया। तीन गुट बनने के बाद लंबे समय तक सहमति नहीं बन सकी।
अंततः सभी पक्षों ने तीन वर्षों के लिए चढ़ावे की राशि 50 लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित करने पर सहमति जताई और खुली बोली के स्थान पर गोली के माध्यम से चढ़ावा तय करने की प्रक्रिया अपनाई गई।
पहली गोली में वर्ष 2026 का चढ़ावा लखन गोठिया-दीपी गोठिया ग्रुप के नाम रहा। दूसरी गोली से वर्ष 2027 के लिए खुबीराम गोठिया-शेरसिंह गोठिया का नाम तय हुआ, जबकि तीसरी गोली से वर्ष 2028 का चढ़ावा रतिराम गोठिया के नाम रहा।
मेले में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
मुख्य मेला 31 अगस्त से 2 सितंबर तक आयोजित होने के कारण आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए प्रशासन, पुलिस, मेला कमेटी और स्थानीय ग्रामीण व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
कारिस देव बाबा के जयकारों से शुरू हुआ यह मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता का भी केंद्र बन रहा है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी है और आसपास के गांवों में भी मेले को लेकर उत्साह का माहौल है।
फिलहाल बाबा के जयकारों के साथ शुरू हुए कारिस देव बाबा मेले में आस्था और उत्साह का रंग दिखाई देने लगा है। अब 31 अगस्त से 2 सितंबर तक होने वाले मुख्य मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।




















































