लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नितिन मेहरा, वरिष्ठ संवाददाता (राजस्थान)
मोहम्मद नजीर कादरी ने किया स्वागत
अजमेर। अपनी मखमली और रूहानी आवाज़ से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले प्रसिद्ध बॉलीवुड पार्श्व गायक शाहिद मल्ल्या ने अजमेर पहुंचकर सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में हाजिरी दी। उन्होंने दरगाह शरीफ में मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश कर देश में अमन, भाईचारे और तरक्की की दुआ मांगी।
दरगाह जियारत के दौरान उनके साथ मौजूद वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद नजीर कादरी ने बुके भेंट कर तथा दस्तारबंदी (साफा पहनाकर) उनका आत्मीय स्वागत और सम्मान किया।
डेढ़ दशक से सुरों का जादू
पिछले लगभग 15 वर्षों से हिंदी, पंजाबी और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में अपनी आवाज़ का जादू बिखेर रहे शाहिद मल्ल्या आज संगीत जगत का एक जाना-पहचाना नाम हैं। सूफियाना अंदाज और भावपूर्ण गायकी के लिए मशहूर शाहिद 70 से अधिक फिल्मी गीतों और स्वतंत्र संगीत एल्बमों में अपनी आवाज़ दे चुके हैं।
‘मौसम’ से मिली बड़ी पहचान
शाहिद मल्ल्या को फिल्म मौसम के लोकप्रिय गीत “रब्बा मैं तो मर गया ओए” और “इक तू ही तू” से व्यापक पहचान मिली। इन गीतों की सफलता ने उन्हें देश-विदेश में लोकप्रिय बना दिया और वे संगीत प्रेमियों के बीच खास स्थान बनाने में सफल रहे।
हर अंदाज के गीतों में माहिर
शाहिद मल्ल्या ने सूफी, रोमांटिक, भावनात्मक और हाई-एनर्जी गीतों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है। उनके चर्चित गीतों में शामिल हैं—
- हीर
- दरिया
- राधा
- शौक
- दो धारी तलवार
- कुक्कड़
- धतिंग नाच
- चित्ता वे
- इक्क कुड़ी

‘कुडमई’ के लिए मिला फिल्मफेयर नामांकन
हाल के वर्षों में प्रदर्शित फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी के लोकप्रिय विवाह गीत “कुडमई” ने शाहिद मल्ल्या के करियर को नई ऊंचाई प्रदान की। इस गीत के लिए उन्हें प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक श्रेणी के लिए नामांकन प्राप्त हुआ।
दरगाह शरीफ में हाजिरी के दौरान शाहिद मल्ल्या ने मन्नत का धागा बांधकर अपनी आगामी संगीतमय यात्रा की सफलता तथा देश में शांति, सद्भाव और खुशहाली की दुआ भी मांगी।

















































