लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
– तमिलनाडु में विजय आंधी ; रील लाइफ से रियल लाइफ के मुकाम बुनने तक का सफर किसी फिल्म कहानी की पटकथा से नहीं कम, दो साल पहले बनाई पार्टी, पहले चुनाव में ही प्रचंड जीत
मनोहरसिंह खोखर। जयपुर
थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की यह जीत वाकई किसी सुपरहिट फ़िल्म के क्लाइमैक्स जैसी रही। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में विजय ने अपनी नई पार्टी के साथ जो करिश्मा दिखाया है, उसने राज्य की 60 साल पुरानी ‘द्रविड़ राजनीति’ की धुरी को हिलाकर रख दिया है। विजय (थलापति) का ‘रील लाइफ’ से ‘रियल लाइफ’ के मुख्यमंत्री बनने तक का सफर और उनके चुनावी वादे किसी फिल्मी पटकथा की तरह ही प्रभावशाली रहे हैं। हालांकि विजय की पार्टी TVK (108 सीटें) बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से सिर्फ 10 सीटें दूर है, इसलिए तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन सरकार बनने की प्रबल संभावना है। सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस के साथ गठबंधन की है। राहुल गांधी ने खुद विजय को फोन कर जीत की बधाई दी है। अगर कांग्रेस DMK का साथ छोड़कर TVK के साथ आती है, तो यह विजय के लिए सबसे बड़ा सहारा होगा। अभी के हालातों में, कांग्रेस और निर्दलीयों का समर्थन ही विजय के लिए मुख्यमंत्री बनने का सबसे आसान रास्ता नजर आ रहा है
फिल्म की तरह सत्ता में भी हीरो जैसी एंट्री :
एक्टर थलापति विजय की तमिलनाडू में भी एंट्री हीरो की तरह रही। वर्ष 2024 में राजनीतिक पार्टी बनाकर सबको चौकाने वाले को मौजूदा सरकार डीएमके ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि उनकी चुनावी रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर बीजेपी ने जरुर गठबंधन की कोशिश की। लेकिन विजय थलापति अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि और स्वामी पेरियार एवं डॅा. भीमराव अंबेडकर के संविधान के आधार पर धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र में पूरा भरोसा करते हुए अपने दम पर लड़े। नतीजा सबके सामने है आज। तमिलनाड़ू में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी और विजय भावी मुख्यमंत्री के तौर पर भी।
सोच से परे का हो गया ‘खेला’ :
टीवीके की चुनावी सभाओं में जिस तरह से लोगों की भीड़ उमड़ी, उसी तरह से लोगों ने अपने स्टार को वोट देकर उसकी झोली भर दी। जो कांग्रेस गठबंधन डीएमके दूसरी बार सत्ता में आने का दम भर रही थी, उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। डीएमके में मुख्यमंत्री एम स्टालिन को भी हार का सामना करना पड़ा। यहां डीएमके लगभग 60 सीटों पर सिमट गई। वहीं भाजपा गठबंधन वाली एआईएडीएमके 50 सीटों पर सिमट गई। खैर बीजेपी यहां पहले दिन से ही सत्ता की लड़ाई में नहीं थी, उसका पूरा फोकस पश्चिम बंगाल पर था। यहां कांग्रेस को ओवर कॅाफिंडेंस था। सारे के सारे एक्जिट पोल भी डीएमके के पक्ष में ही नतीजे बता रहे थे।
भारतीय राजनीति के पुराने मिथक को तोड़ा :
आम आदमी पार्टी (AAP) और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) दोनों ने ही भारतीय राजनीति के उस पुराने मिथक को तोड़ा है कि एक नई पार्टी को सत्ता तक पहुँचने में दशकों लग जाते हैं। इन दोनों की सफलता में कुछ हैरान कर देने वाली समानताएँ है। जहाँ ‘आप’ ने 2012 में गठन के मात्र 1 साल के भीतर दिल्ली में सरकार बना ली थी, वहीं विजय की TVK ने फरवरी 2024 में घोषणा के मात्र 2 साल के भीतर तमिलनाडु की 60 साल पुरानी द्रविड़ राजनीति को हिलाकर 108 सीटें जीत लीं। जिस तरह 2013 में अरविंद केजरीवाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया था, ठीक उसी तरह विजय की पार्टी के उम्मीदवार वीएस बाबू ने मौजूदा मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके गढ़ कोलाथुर में मात दी। दोनों ही पार्टियों ने खुद को स्थापित ‘भ्रष्ट’ या ‘वंशवादी’ पार्टियों के खिलाफ एक “साफ-सुथरे विकल्प” के रूप में पेश किया। ‘आप’ ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का सहारा लिया, तो विजय ने अपनी बेदाग छवि और ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस’ (मदद और न्याय) के विचार को आगे बढ़ाया। दोनों ही पार्टियों की रीढ़ की हड्डी युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता रहे हैं, जिन्होंने पारंपरिक कैडर-आधारित राजनीति के मुकाबले एक नए नायक को चुना।
पेरियार और अंबेडकर के सिद्दांतों को किया फॅालो :
बीजेपी जहां कट्टर हिंदू वादी विचार धारा पर चल रही थी तो कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की बात करती थी। वहीं विजय थलापति की पार्टी ने “धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय” को मुख्य विचारधारा अपनाई। यह पार्टी खुद को एक केंद्र वामपंथी राजनीतिक दल के रुप में स्थापित करती है। जिसका धर्मनिरपेक्षता , सामाजिक न्याय, समतावाद, और लोकतंत्र में पूरा विश्वास है। स्टार विजय और उनकी पार्टी पेरियार के सामाजिक समानता और तर्कवाद का समर्थन करती है, तो अंबेडकर के संवैधानिक अधिकार और वंचितों के उत्थान, वंचितों की रक्षा और हाशिए पर पड़े लोगों का उत्थान और संवैधानिक नैतिकता की ऱक्षा करना है। टीवीके ने द्रविड़ राष्ट्रवाद और तमिल राष्ट्रवाद को अलग नहीं मानती, बल्कि इन दोनों के मिश्रण पर चलती है।
बड़े नेताओं और मंत्रियों के किलों को किया ध्वस्त :-
वी.एस. बाबू (कोलाथुर): इस चुनाव की सबसे बड़ी जीत। उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को उनके गढ़ कोलाथुर में 8,795 वोटों से हराकर सबको स्तब्ध कर दिया।
– कमली एस. (अविनाशी): इन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता डॉ. एल. मुरुगन को लगभग 15,000 वोटों से हराया।
– आर. सबरीनाथन (विरुगमपक्कम): विजय के ड्राइवर के बेटे सबरीनाथन ने DMK और AIADMK के अनुभवी नेताओं को 22,000 से अधिक वोटों से हराकर यह साबित कर दिया कि यह जीत ‘आम आदमी’ की जीत है।
– एम.एल. विजयप्रभु (माधवरम): इन्होंने DMK के एस. सुधाकरनम को 94,985 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराया, जो इस चुनाव की सबसे बड़ी मार्जिन वाली जीत में से एक है।
– के.के. अनंत मोहन (इरोड वेस्ट): इन्होंने DMK के कद्दावर मंत्री एस. मुथुसामी को 22,250 वोटों से शिकस्त दी।
– आदव अर्जुना (विल्लिवाक्कम): ‘लॉटरी किंग’ सैंटियागो मार्टिन के दामाद आदव ने भी अपनी सीट पर शानदार जीत दर्ज की।
– स्वयं विजय ने भी अपनी दोनों सीटों, पेरम्बूर (53,715 वोट से जीत) और त्रिची ईस्ट (27,416 वोट से जीत), पर भारी अंतर से जीत हासिल कर अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया है।
सबसे चर्चित चुनावी वादे:
– महिलाओं को शादी में 8 ग्राम सोना देना।
– सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात बच्चे को पार्टी की ओर से सोने की अंगूठी उपहार में देना।
रील लाइफ से रियल लाइफ जैसा राजनीतिक सफर :
विजय ने अपनी फिल्मों (जैसे Sarkar, Mersal) के जरिए सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बोलना शुरू किया था। फरवरी 2024 में उन्होंने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की आधिकारिक घोषणा की। राजनीति के प्रति अपनी गंभीरता दिखाने के लिए उन्होंने अपनी 69वीं फिल्म के बाद अभिनय छोड़ने का साहसिक निर्णय लिया। विल्लुपुरम की विशाल रैली में उन्होंने अपनी विचारधारा को ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस’ बताया, जिसने युवाओं को अपनी ओर खींचा। विजय ने ‘द्रविड़ मॉडल’ के मुकाबले अपना ‘TVK मॉडल’ पेश किया, जिसमें सरकारी स्कूलों और अस्पतालों का कायाकल्प और मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। राज्य प्रशासन में पूरी पारदर्शिता लाने का वादा। स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में प्राथमिकता और नए उद्योग स्थापित करना।
तमिलनाडु में नशीले पदार्थों के बढ़ते जाल को पूरी तरह खत्म करने का कड़ा संकल्प। महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए विशेष योजनाएं।
‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाएंगे दल :
– कांग्रेस (INC) – 5 सीटें: यह सबसे निर्णायक शक्ति हो सकती है। अगर कांग्रेस अपने पुराने सहयोगी DMK का साथ छोड़कर विजय को समर्थन देती है, तो TVK बहुमत के बेहद करीब पहुँच जाएगी। राहुल गांधी की विजय को दी गई बधाई इस ओर इशारा कर रही है।
– PMK (पट्टाली मक्कल कात्ची) – 4-5 सीटें: उत्तरी तमिलनाडु में मजबूत पकड़ रखने वाली यह पार्टी अक्सर सत्ता की चाबी अपने पास रखती है। विजय के ‘स्वच्छ राजनीति’ के वादे के साथ इनका जुड़ाव सरकार बनवा सकता है।
– छोटे दल और निर्दलीय (3-4 सीटें): सदन में मौजूद 2-3 निर्दलीय विधायक और छोटे दलों के सदस्य इस समय सबसे ज्यादा मांग में हैं। विजय को अपनी पहली सरकार बनाने के लिए इनका ‘बिना शर्त’ समर्थन चाहिए होगा।
– विपक्ष का रुख (DMK और AIADMK): यदि विजय किसी भी दल के साथ औपचारिक गठबंधन नहीं करते, तो उन्हें सदन में बहुमत साबित करने के लिए AIADMK (53 सीटें) के ‘मौन समर्थन’ या वॉकआउट की जरूरत पड़ सकती है, ताकि बहुमत का आंकड़ा कम हो जाए।


















































