लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर/नई दिल्ली।(रूपनारायण सांवरिया)। राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ द्वारा सोशल मीडिया पर बढ़ते अश्लील और हानिकारक कंटेंट के मुद्दे को संसद में उठाने के बाद केंद्र सरकार ने इस पर विस्तृत और ठोस जवाब दिया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा कानूनी ढांचा इस तरह की सामग्री पर नियंत्रण के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी उपकरण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इंटरनेट को सुरक्षित, जिम्मेदार और कानूनसम्मत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।
सख्त कानूनी प्रावधान
सरकार ने बताया कि आईटी एक्ट के तहत कई गंभीर साइबर अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान है। इनमें पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, निजता का उल्लंघन, अश्लील और यौन स्पष्ट सामग्री का प्रसारण, बाल यौन शोषण सामग्री और साइबर आतंकवाद जैसे अपराध शामिल हैं।
सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय
आईटी नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज़ को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि उनके प्लेटफॉर्म पर अश्लील, भ्रामक, बच्चों के लिए हानिकारक या कानून-विरुद्ध सामग्री का प्रसार न हो। नियमों का उल्लंघन करने पर उन्हें कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा और कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, 50 लाख से अधिक यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत में ग्रिवेंस ऑफिसर, चीफ कंप्लायंस ऑफिसर और नोडल संपर्क अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य किया गया है, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ 24×7 समन्वय बना रहे।
शिकायत निवारण के लिए नई व्यवस्था
यूजर्स की शिकायतों के समाधान के लिए सरकार ने ग्रिवेंस अपीलेट कमेटियों का गठन किया है। साथ ही, अदालत या सरकारी एजेंसियों के निर्देश मिलने पर अवैध कंटेंट को तय समय सीमा में हटाना भी अनिवार्य किया गया है।
डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट पर भी सख्ती
20 फरवरी 2026 से लागू संशोधित आईटी नियमों में डीपफेक और सिंथेटिक जनरेटेड कंटेंट जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं। इन नियमों के तहत ऐसे कंटेंट की पहचान, लेबलिंग और तकनीकी सत्यापन को अनिवार्य किया गया है, जिससे भ्रामक और हानिकारक सामग्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
सरकार की पहल की सराहना
मदन राठौड़ ने केंद्र सरकार के जवाब को दूरदर्शी और प्रभावी बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन कदमों से न केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि युवाओं और बच्चों को डिजिटल खतरों से भी सुरक्षा मिलेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत एक सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सख्त कानून, जवाबदेही और नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने की तैयारी भारत को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में और मजबूत बनाएगी।














































