लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नई एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस पॉलिसी से निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगी गति
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार “विकसित राजस्थान” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रही है। कृषि, ऊर्जा, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों के साथ-साथ अब राज्य सरकार ने एयरोस्पेस और डिफेंस विनिर्माण क्षेत्र को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस पॉलिसी लागू की है।
इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना, आत्मनिर्भरता को मजबूत करना तथा राष्ट्रीय एयरोस्पेस-डिफेंस विनिर्माण में राजस्थान की भागीदारी को सुदृढ़ करना है। नीति के माध्यम से राजस्थान को एयरोस्पेस और डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए गए हैं।
निवेश, एमएसएमई और स्टार्टअप्स पर फोकस
नई नीति के तहत बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित इकोसिस्टम के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इससे न केवल औद्योगिक विकास को गति मिलेगी बल्कि प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

नीति के अंतर्गत एयरोस्पेस और डिफेन्स क्षेत्र से जुड़े विनिर्माण उद्यमों, उपकरण एवं घटक निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, प्रिसीजन इंजीनियरिंग इकाइयों तथा मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग (MRO) से जुड़ी इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जाएगा। 
परियोजनाओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया
नीति के अनुसार विनिर्माण परियोजनाओं को अचल पूंजी निवेश के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है—
-
लार्ज परियोजना: 50 करोड़ से 300 करोड़ रुपये तक निवेश
-
मेगा परियोजना: 300 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपये तक निवेश
-
अल्ट्रा मेगा परियोजना: 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश

वहीं, सर्विस सेक्टर के लिए—
-
25 से 100 करोड़ रुपये तक निवेश को लार्ज,
-
100 से 250 करोड़ रुपये तक मेगा,
-
और 250 करोड़ रुपये से अधिक निवेश को अल्ट्रा मेगा श्रेणी में रखा जाएगा।

विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को मिलेंगे आकर्षक प्रोत्साहन
एयरोस्पेस एवं डिफेन्स पार्कों में स्थापित पात्र उद्यमों को 7 वर्षों तक राज्य कर के 75 प्रतिशत पुनर्भरण के रूप में एसेट क्रिएशन इंसेंटिव दिया जाएगा।
इसके साथ ही उद्यमों को—
-
विनिर्माण क्षेत्र के लिए 20 से 28 प्रतिशत
-
सर्विस सेक्टर के लिए 14 से 20 प्रतिशत तक
पूंजीगत अनुदान या फिर टर्नओवर लिंक्ड इंसेंटिव में से किसी एक विकल्प को चुनने की सुविधा मिलेगी।
अतिरिक्त बूस्टर और भूमि संबंधी लाभ
नीति के तहत रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए एम्प्लॉयमेंट बूस्टर, पहली मेगा और अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए सनराइज बूस्टर, एंकर बूस्टर और थ्रस्ट बूस्टर जैसे अतिरिक्त लाभ भी दिए जाएंगे।
रीको से भूमि लेने वाले मेगा और अल्ट्रा मेगा उद्यमों को फ्लेक्सिबल लैंड पेमेंट, ऑफिस स्पेस के लिए लीज रेंटल सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।
निवेशकों के लिए विशेष इंसेंटिव्स
नीति में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बैंकिंग, व्हीलिंग और ट्रांसमिशन चार्ज में छूट, कैप्टिव पावर प्लांट में निवेश को पात्र पूंजीगत निवेश में शामिल करने जैसे प्रावधान किए गए हैं।
इसके अलावा—
-
7 वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत-प्रतिशत छूट
-
मंडी और बाजार शुल्क का पूर्ण पुनर्भरण
-
स्टाम्प शुल्क और रूपांतरण शुल्क में छूट

-
ग्रीन इंसेंटिव, स्किल ट्रेनिंग और बौद्धिक संपदा सृजन से जुड़े लाभ
जैसे प्रावधान इस नीति को निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाते हैं।








































