बचपन की दोस्ती: रिश्तों की बुनियाद

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बचपन की दोस्ती, रहती है बेमिसाल

बचपन की दोस्ती जीवन का वह अमूल्य खजाना है, जिसे शब्दों में बयां करना कठिन है। यह वह रिश्ता है, जो स्वार्थ, भेदभाव और अपेक्षाओं से परे होता है। यह केवल मासूमियत और सच्चाई पर आधारित होता है। बचपन के दोस्त हमारे पहले साथी, पहले सहायक और पहले शिक्षक होते हैं, जिनके साथ हम हंसते, रोते और जीवन के शुरुआती अनुभव साझा करते हैं।

बचपन की दोस्ती की सबसे खास बात यह है कि इसमें दिखावे और स्वार्थ की जगह नहीं होती। यह रिश्ता एक ऐसी नींव तैयार करता है, जो आगे के जीवन में सभी रिश्तों को समझने और निभाने में मदद करता है। जब हम बड़े होते हैं, तो जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं के कारण अक्सर यह दोस्ती पीछे छूट जाती है। लेकिन, यह वही दोस्ती है जो हमें हमारी जड़ों की याद दिलाती है और हमें वही मासूमियत और सरलता में वापस ले जाती है।

बचपन की दोस्ती को क्यों संजोएं?

1. भावनात्मक सहारा: बचपन के दोस्त हमें बिना किसी अपेक्षा के समझते हैं और मुश्किल समय में सहारा देते हैं।

2. मासूमियत की याद: उनके साथ बिताया समय हमें याद दिलाता है कि जीवन की सच्ची खुशी सरलता और सच्चाई में है।

3. असली रिश्ता: यह रिश्ता हमारे जीवन का पहला सच्चा संबंध होता है, जिसमें न कोई झूठ होता है और न कोई स्वार्थ।

 

इसे निभाने के कुछ तरीके

संपर्क बनाए रखें: समय के साथ अलग हो जाना स्वाभाविक है, लेकिन आज के डिजिटल युग में संपर्क बनाए रखना आसान है।

पुरानी यादों को ताजा करें: कभी-कभी अपने बचपन के दोस्तों से मिलें और उन पुरानी यादों को साझा करें।

विश्वास बनाए रखें: दोस्ती की बुनियाद विश्वास है। इसे कभी टूटने न दें।

समय निकालें: चाहे कितना भी व्यस्त जीवन हो, उन दोस्तों के लिए समय निकालें, जिन्होंने आपके बचपन को खास बनाया।

बचपन की दोस्ती का महत्व

यह रिश्ता हमें न केवल हमारे बचपन से जोड़ता है, बल्कि यह हमें सिखाता है कि रिश्तों में मासूमियत और सच्चाई कितनी महत्वपूर्ण है। बचपन के दोस्त हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। वे हमारे पहले आदर्श, पहले आलोचक और पहले प्रेरक होते हैं।

इसलिए, “बचपन की दोस्ती, रिश्तों की बुनियाद। इसे संजोएं, इसे निभाएं।” यह सिर्फ एक टैगलाइन नहीं, बल्कि एक सच्चाई है। यदि आप अपने बचपन के दोस्तों के साथ जुड़े रहेंगे, तो आप खुद से और अपने जीवन की मासूमियत से कभी दूर नहीं होंगे।
अनिल माथुर
जोधपुर (राजस्थान)

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