लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजसमंद। आधुनिकता की तेज़ रफ्तार के बीच ग्रामीण अंचलों में आज भी कई ऐसी परंपराएं जीवित हैं, जो लोगों में कौतूहल जगाती हैं। ऐसी ही एक अनोखी परंपरा है ‘टोटिया रस्म’, जिसमें दूल्हे के परिवार की महिलाएं बरात में शामिल नहीं होतीं, बल्कि घर पर रहकर विशेष धार्मिक विधियां संपन्न करती हैं।
झोर गांव की महिलाएं सीमा वैष्णव और सीता वैष्णव बताती हैं कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। मान्यता है कि जब बरात घर से निकलती है, तब घर की महिलाएं सुख-समृद्धि, नवदंपति की रक्षा और परिवार की मंगलकामना के लिए यह रस्म निभाती हैं।
ऐसे निभाई जाती है ‘टोटिया रस्म’
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महिलाएं घर के आंगन या चौक में एकत्र होती हैं।
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पारंपरिक गीत गाए जाते हैं।
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नारियल, सुपारी, हल्दी, कुमकुम, दीपक और पूजा सामग्री के साथ विधि-विधान से पूजा की जाती है।
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दूल्हे की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार में स्थायी समृद्धि की कामना की जाती है।
कुछ स्थानों पर यह भी मान्यता है कि यदि सभी परिजन बरात में चले जाएं तो घर सूना हो जाता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों के प्रवेश की आशंका रहती है। इसी कारण महिलाएं घर पर रहकर पूजा करती हैं ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
दुल्हन के स्वागत से जुड़ा है विशेष महत्व
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि दुल्हन के गृह प्रवेश के समय वही महिलाएं पूरे विधि-विधान से उसका स्वागत करती हैं। माना जाता है कि इससे घर में मंगल और शांति का संचार होता है।
परंपरा का बदलता स्वरूप
हालांकि समय के साथ कई परिवारों में यह परंपरा कम हो रही है, लेकिन राजसमंद क्षेत्र में आज भी बड़ी संख्या में लोग इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ निभा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि ‘टोटिया रस्म’ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक एकता का प्रतीक है, जो संस्कृति को संजोकर रखने का काम करती है।
राजसमंद की यह अनूठी परंपरा आज भी लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का कार्य कर रही है।
