लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
NH-45 पर 12 किमी में 25 अंडरपास, लाल चेकर पैटर्न ड्राइवरों को वन्य क्षेत्र में प्रवेश की चेतावनी देता है
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और सड़क सुरक्षा को एक साथ ध्यान में रखते हुए देश में पहली बार लाल रंग के चेकर मार्किंग वाला राजमार्ग विकसित किया गया है। भोपाल–जबलपुर के बीच स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 45 का 11.96 किमी लंबा हिरन–सिंदूर खंड नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य और वीरांगना दुर्गावती बाघ अभ्यारण्य से होकर गुजरता है।
इस संवेदनशील क्षेत्र में जानवरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 25 अंडरपास बनाए हैं, जिससे वन्यजीव बिना व्यवधान के सड़क के नीचे से सुरक्षित रूप से मार्ग पार कर सकें।
क्यों बनाया गया लाल चेकर हाईवे?
राजमार्ग पर बने लाल उभरे हुए निशान ड्राइवरों को संकेत देते हैं कि वे वन्यजीव क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। ये मार्किंग हल्की ऊँची हैं, जिससे वाहन की गति अपने आप कम हो जाती है।
लाल रंग इसलिए चुना गया क्योंकि:
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इसकी तरंगदैर्ध्य अधिक होती है
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यह दूर से भी सबसे अधिक आकर्षित करता है
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चेतावनी संकेत के तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी माना गया है
पूरा लगभग 12 किमी का खंड इन मार्किंग से ढका हुआ है।
जंगलों की सुरक्षा के लिए 8 फीट ऊँची बाड़
मार्ग के दोनों ओर लोहे की 8 फीट ऊँची फेंसिंग लगाई गई है, जिससे जानवर सड़क पर न आ सकें।
इसके बावजूद कुछ हिस्सों में दुर्घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिन्हें कम करने के लिए अतिरिक्त प्रयास जारी हैं।
यहां दिखते हैं हिरण, सांभर, सियार और बाघ
इस क्षेत्र में वन्यजीवों का घनत्व अधिक है।
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार:
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पंजाब में 53% सड़क दुर्घटना मौतें पशुओं से टक्कर के कारण होती हैं
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मध्य प्रदेश में पिछले दो वर्षों में 237 दुर्घटनाएं और 94 मौतें दर्ज की गई हैं
इस वजह से NH-45 पर ये उपाय बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
पर्यटन और राजस्व पर भी होगा सकारात्मक प्रभाव
परियोजना रिपोर्ट में बताया गया है कि वन्यजीव क्षेत्र के पुनर्वर्गीकरण और हाईवे के सुरक्षित निर्माण से पर्यटन में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे स्थानीय रोजगार और राजस्व में भी वृद्धि होगी।
दुनिया के विकसित देशों से प्रेरित मॉडल
मध्य प्रदेश का यह हाईवे पूरी तरह वैश्विक मानकों से प्रेरित है।
उदाहरण:
कनाडा — बैन्फ नेशनल पार्क
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ट्रांस-कनाडा हाईवे पर ओवरपास, अंडरपास और फेंसिंग
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वन्यजीव क्रॉसिंग के सफल प्रयोग से दुर्घटनाओं में बड़ा कमी
नीदरलैंड्स — इकोडक्ट्स
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600+ वन्यजीव क्रॉसिंग
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दुनिया की सबसे बड़ी क्रॉसिंग:
“नटूरब्रग ज़ैंडरिज क्राइलू” (800 मीटर लंबी, 50 मीटर चौड़ी)
भारत अब इन्हीं अंतरराष्ट्रीय मॉडलों की तर्ज पर वन्यजीव-अनुकूल सड़क डिजाइन विकसित कर रहा है।
















































