लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
सुथड़ा जैन तीर्थ क्षेत्र में पर्युषण पर्व पर मार्दव धर्म का आयोजन
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक)।
उपखंड क्षेत्र के श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र, सुथड़ा में बड़ी धूमधाम के साथ जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का गर्भ कल्याणक मनाया गया। इस अवसर पर पर्युषण पर्व के अंतर्गत मार्दव धर्म का आयोजन भी किया गया।
मार्दव धर्म का महत्व
प्रबंध कमेटी अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा एवं सह-कोषाध्यक्ष मनोज कुमार जैन ने बताया कि “मार्दव का अर्थ है – कोमलता, नम्रता, अहंकार का त्याग और सहजता से हर परिस्थिति को स्वीकार करना।”
उन्होंने कहा कि उत्तम मार्दव धर्म, दशलक्षण धर्म का दूसरा चरण है, जो आत्मा की कठोरता को पिघलाकर उसे कोमल बनाता है और ‘मैं श्रेष्ठ’, ‘मैं ही सही’ जैसी संकीर्णताओं से मुक्त करता है।
सुपार्श्वनाथ भगवान का जीवन प्रसंग
भगवान सुपार्श्वनाथ का जन्म वाराणसी में हुआ था। सांसारिक विषयों से विरक्त होकर उन्होंने राज्य का त्याग कर दीक्षा ग्रहण की। उनके संघ में लाखों साधु-साध्वियाँ सम्मिलित थीं।
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां
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मंगलाष्टक एवं नित्य अभिषेक-शांति धारा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ।
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देव शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान और दशलक्षण मूलनायक भगवान की पूजा।
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सुपार्श्वनाथ भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया गया।
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भक्तामर अनुष्ठान एवं दीपार्चना शाम 7:30 बजे भक्तामर मंडल उनियारा द्वारा सम्पन्न कराई गई।
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पुण्यार्जक परिवार का प्रबंध कमेटी द्वारा माला व दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया गया।