लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
श्रीगंगानगर में बनेगा एयरबेस, प्रोजेक्ट ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत होगा काम, लालगढ़ जाटान सहित 58 किसानों की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज
मनजीत सिंह, ब्यूरो चीफ, श्रीगंगानगर (9887287446)
श्रीगंगानगर: भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में प्रस्तावित फॉरवर्ड कंपोजिट एविएशन बेस (FCAB) के लिए भूमि अधिग्रहण को राजस्थान हाईकोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए कोर्ट ने लालगढ़ जाटान और आसपास के क्षेत्रों के 58 किसानों की याचिका खारिज कर दी। अब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक इस महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट का निर्माण तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में व्यक्तिगत हितों से ऊपर जनहित और देशहित को तरजीह दी जाती है। कोर्ट ने याचिका को केवल तकनीकी आपत्तियों पर आधारित बताते हुए इसे रक्षा प्रोजेक्ट को रोकने की कोशिश करार दिया। पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए याचिका और सभी अंतरिम आवेदनों को खारिज कर दिया गया।
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’ प्रोजेक्ट?
यह प्रोजेक्ट रक्षा मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत श्रीगंगानगर जिले के लालगढ़ जाटान और आस-पास के इलाकों में पाकिस्तान सीमा के करीब एक अत्याधुनिक एयरबेस बनाया जाएगा। रणनीतिक दृष्टि से यह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीमा पर वायुसेना की त्वरित कार्रवाई क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
अधिग्रहण में चक 21 SDS की करीब 130.349 हेक्टेयर निजी भूमि और 2.476 हेक्टेयर सरकारी भूमि शामिल है। कुल 132.825 हेक्टेयर जमीन पर यह बेस विकसित किया जाएगा।
किसानों के तर्क
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में दावा किया कि:
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भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का पालन नहीं हुआ।
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सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) निष्पक्ष नहीं था।
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प्रभावित किसानों की जनसुनवाई ठीक से नहीं हुई।
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पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन (R&R) की कोई योजना नहीं बनाई गई।
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मुआवजा बाजार दर और सेल डीड के आधार पर सही ढंग से तय नहीं हुआ।
किसान 14 नवंबर 2023 की प्रारंभिक अधिसूचना से लेकर 25 जुलाई 2025 तक की पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग कर रहे थे।
सरकार की दलील
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है। SIA प्राभु फाउंडेशन द्वारा कराया गया और 27 सितंबर 2022 को जनसुनवाई की गई, जिसकी वीडियो और फोटो रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
संयुक्त सर्वे रिपोर्ट (16 अक्टूबर 2024) में स्पष्ट है कि किसी का घर या आवासीय मकान नहीं टूट रहा और कोई विस्थापन नहीं हो रहा, इसलिए R&R योजना बनाना आवश्यक नहीं था। कुल 162 किसान प्रभावित माने गए, लेकिन किसी की आजीविका का मुख्य स्रोत प्रभावित नहीं हो रहा।
कोर्ट का फैसला और टिप्पणी
कोर्ट ने रिकॉर्ड देखा और पाया कि जनसुनवाई की तारीख, अखबारी प्रकाशन, मिनट्स और फोटो सभी मौजूद हैं। जॉइंट सर्वे और आपत्तियों का निस्तारण कानून के अनुसार हुआ। डिविजनल कमिश्नर को R&R प्रशासक नियुक्त किया गया था, जिनकी रिपोर्ट सही पाई गई।
कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यह याचिका केवल प्रोजेक्ट को रोकने की कोशिश थी, इसलिए इसे खारिज कर दिया गया।


















































