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संविधान दिवस पर दो जजों ने बिना दहेज–फिजूलखर्ची के की शादी

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
संविधान दिवस पर दो जजों ने बगैर दहेज शादी कर दिया संदेश
समाज में सादगी और संवैधानिक मूल्यों की अनूठी मिसाल
कोटपूतली-बहरोड़। संविधान दिवस पर जिले में एक प्रेरणादायी और अनुकरणीय पहल देखने को मिली, जब दो न्यायिक अधिकारियों ने बिना दहेज और बिना किसी फिजूलखर्ची के कोटपूतली-बहरोड़ जिला कलेक्टर कार्यालय में संविधान और बाबा साहेब को साक्षी मानकर विवाह कर समाज के सामने मिसाल पेश की।
बानसूर के गांव गूता शाहपुर निवासी हेमन्त मेहरा और हनुमानगढ़ निवासी करीना काला, दोनों सिविल न्यायाधीश हैं। इन्होंने वैवाहिक समारोह को पूरी सादगी के साथ आयोजित किया और संविधान को साक्षी मानकर संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सुधार का संदेश दिया।

सादगीपूर्ण विवाह बना चर्चा का विषय
बड़े-बड़े विवाह समारोहों के दौर में यह सादगीपूर्ण विवाह जिले में सकारात्मक संदेश लेकर आया। न दहेज, न तामझाम—केवल परिवारजन, अधिकारीगण और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान।
‍⚖️ दोनों जजों की पृष्ठभूमि
हेमन्त मेहरा वर्तमान में चौथ का बरवाड़ा, सवाईमाधोपुर में सिविल न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं।
करीना काला प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
अधिकारियों का आशीर्वाद
जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर ओमप्रकाश सहारण सहित दोनों परिवारों ने नवदम्पत्ति को आशीर्वाद देते हुए उनके इस निर्णय की सराहना की।
उन्होंने कहा कि यह विवाह समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।
नवदंपत्ति की प्रेरक बात
हेमन्त और करीना ने कहा—
“हम न्यायिक सेवा में हैं, इसलिए हमने संविधान को सर्वोपरि मानते हुए संविधान दिवस पर ही विवाह बंधन में बंधने का निर्णय लिया। समाज को सादगी और समानता का संदेश देना हमारा उद्देश्य है।”
यह विवाह न केवल जिले में चर्चा का विषय बना, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा है कि सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए छोटे–छोटे कदम भी बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

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