लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
फूड लाइसेंस के नाम पर 500 रूपये की जगह 800 रुपए लेना व 300 रूपये सेवा शुल्क बताना विभाग को पड़ा महंगा,
जिला कलेक्टर के निर्देश पर डीएसओ टीम व चिकित्सा विभाग के बीसीएमएचओ जांच के लिए पहुंचे मारोठ
मारोठ: आमजन को शुद्ध एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से “शुद्ध आहार – मिलावट पर वार“ अभियान के तहत जिला कलेक्टर डॉ महेंद्र खड़गावत के निर्देशानुसार जिले में रजिस्ट्रेशन कैंप आयोजित किये जा रहे है। जिसके तहत खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा फूड लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन कैंप का आयोजन शुक्रवार को मारोठ (नावां) में किया गया। जिसमें 17 खाद्य कारोबार कर्ताओं के रजिस्ट्रेशन जारी किए गए हैं।
विभाग द्वारा दुकानदारों से फूड लाइसेंस रजिस्ट्रेशन के तहत 500 रुपए ओर दुकानदारों की सुविधाओं के तहत व्यवस्था के नाम से 300 रुपए सहित 800 रुपए लिए गए। जबकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यही फूड लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन सभी ईमित्र पर 600 से 700 रूपये में बनाए जा रहे हैं।
फूड इंस्पेक्टर ने स्वीकारी सुविधा शुल्क लेने की बात
इस बारे में फूड इंस्पेक्टर बाबूलाल चौधरी से जानकारी चाही गईं तो उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 500 रुपए ही लिए जा रहे हैं और 300 रूपये व्यापारियों को सुविधा मिले इसके लिए हमारे साथ आया ईमित्र द्वारा लिए जा रहे है।
जहां राहत मिले वहां भी नहीं बख्शा
सरकार द्वारा खाद लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन कैंप में सुविधा के नाम से 300 रुपए लेना खबर छपते ही जिला कलेक्टर ने कार्रवाई करते हुए जांच के निर्देश दिए जिसको लेकर सोमवार को डीएसओ टीम के ई ओ दीपक कुल्हरी,इंस्पेक्टर रामलाल और चिकित्सा विभाग के बीसीएमएचओ सौरभ जैन जांच के लिए मारोठ पहुंचे जांच के दौरान टीम ने व्यापारियों से पूछताछ की जिसमें व्यापारियों ने स्वीकार किया कि हमने 500 की जगह 800 रुपए दिए हैं जिसमें 300 रुपए हमने सुविधा के दिए हैं।
सभी जगह चला अवैध वसूली का खेल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा फूड लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन कैंप 9 जनवरी को बुडसू मकराना, 30 दिसंबर को लिचाना परबतसर, 23 दिसंबर को कुकनवाली कुचामन, 9 दिसंबर को लूणवा नावां में किया गया ओर इन जगहों के दुकानदारों से भी 500 की जगह 800 रुपए लिए गए हैं।
सोचने वाली बात यह है कि प्रशासन व विभाग अब क्या कार्रवाई करेगा सहमति से राजकीय कार्य में बख्शीश दी जा सकती है या व्यवस्था के नाम से सहमति से रुपए लिए जा सकते हैं।
इनका कहना है:
जिला कलेक्टर के निर्देश पर हमने मारोठ पहुंचकर मामले की जानकारी ली है व्यापारीयो द्वारा लिखित में पूछताछ के दौरान लेटर दिया गया जो हम उच्च अधिकारियों तक पहुंचा देंगे।
सौरभ जैन ब्लॉक सीएमएचओ नावां।