लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। राजस्थान स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में देवस्थान विभाग राज्यभर के अपने प्रत्यक्ष प्रभार, राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी के 593 मंदिरों तथा ट्रस्टों द्वारा संचालित 21 मंदिरों में 18 मार्च 2026 को विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगा।
इस संबंध में देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बुधवार को विभाग की शासन सचिव शुचि त्यागी के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मंत्री कुमावत ने बताया कि राजस्थान दिवस के अवसर पर 563 राजकीय मंदिरों में विशेष आरती तथा 51 प्रमुख मंदिरों में संध्या समय महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिरों को आकर्षक रूप से सजाया जाएगा तथा दीप प्रज्ज्वलन, भजन संध्या और विशेष पूजा-अर्चना के कार्यक्रम होंगे। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का उद्देश्य राज्य की समृद्ध संस्कृति और धार्मिक धरोहर से लोगों को जोड़ना है।
इन राजकीय मंदिरों में होंगे विशेष कार्यक्रम
देवस्थान मंत्री ने बताया कि प्रत्यक्ष प्रभार एवं आत्मनिर्भर श्रेणी के 30 प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे। इनमें प्रमुख रूप से उदयपुर का हनुमानजी मांझी का घाट मंदिर, राजसमंद का रूपनारायण जी मंदिर, प्रतापगढ़ का दीपनाथ महादेव, चित्तौड़गढ़ का मंगलेश्वर महादेव, सलूंबर का तेजानंद बिहारी, जोधपुर का राजरणछोड़ जी मंदिर, पाली का सोमनाथ महादेव, जैसलमेर का बांकड़े बिहारी, हनुमानगढ़ का गोगाजी गोगामेड़ी, चूरू का सदाशिव जी राजगढ़, बीकानेर का लक्ष्मीनाथ जी मंदिर और जयपुर का बृजनिधि जी मंदिर शामिल हैं।
इसके अलावा आमेर का माताजी मावलियान मंदिर, जयपुर का रामचंद्र जी सिरहडयोढी बाजार मंदिर, धौलपुर का राधाबिहारी जी मंदिर, भरतपुर का गंगा जी मंदिर, डीग का लक्ष्मण जी मंदिर, करौली का प्रताप नवल बिहारी जी मंदिर, सवाई माधोपुर का रघुनाथ जी मंदिर, भीलवाड़ा के मांडलगढ़ स्थित चतुर्भुज जी (सिंगोली श्याम जी), टोंक का भुतेश्वर जी मंदिर, कोटा का रंगबाड़ी बालाजी, बारां का अनंतराम प्यारेराम जी, बूंदी का केशवराय जी मंदिर, झालावाड़ का द्वारकाधीश जी मंदिर, डूंगरपुर का नीलकंठ महादेव, उदयपुर का ऋषभदेव जी मंदिर, बांसवाड़ा का सिद्धि विनायक जी मंदिर आदि प्रमुख हैं।
प्रमुख ट्रस्ट मंदिरों में भी होंगे कार्यक्रम
देवस्थान विभाग के सार्वजनिक प्रन्यास मंदिर मंडल द्वारा संचालित 21 मंदिरों में भी विशेष कार्यक्रम होंगे। इनमें उदयपुर का कल्याराय जी अस्थल मंदिर, राजसमंद का द्वारकाधीश जी कांकरोली, बाड़मेर का वीरातरा माता मंदिर, जालोर का आपेश्वर महादेव, माउंट आबू का दुलेश्वर महादेव, अलवर का महादेव जी त्रिपोलिया मंदिर, सीकर का कल्याण जी मंदिर, झुंझुनूं का रोड के बालाजी, कोटपुतली-बहरोड़ का श्याम जी मंदिर, खैरथल-तिजारा का बाबा मोहनराम मंदिर शामिल हैं।
इसी तरह जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर, दौसा का मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, डीग का पुंछरी का लोठा (श्रीनाथजी), भरतपुर का हनुमान जी लुधावाई, अजमेर का ब्रह्मा जी पुष्कर मंदिर, नागौर के मेड़ता का चारभुजा जी मंदिर, परबतसर का जोगमाता (कैवाय माता) मंदिर तथा ब्यावर का गणेश जी मंदिर भी कार्यक्रमों में शामिल रहेंगे।
देवस्थान मंत्री ने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से राजस्थान की धार्मिक परंपराओं, संस्कृति और लोक आस्था को व्यापक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
