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संतोष निर्मल जी नहीं रहे,,,

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार संतोष निर्मल नहीं रहे 
संतोष निर्मल जी के जाने की ख़बर ने मन के भीतर एक ऐसी ख़ामोशी भर दी, जिसे न आँसू तोड़ पा रहे हैं, न शब्द। वे केवल राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार नहीं थे—वे उन विरले लोगों में थे, जिनकी उपस्थिति बिना बोले भी भरोसा देती थी। मेरे लिए वे बड़े भाई समान थे, ऐसे भाई जो रास्ता बताते नहीं थे, बल्कि अपने आचरण से रास्ता बना देते थे।
अंतरमुखी, कम बोलने वाले, ज़्यादा लिखने वाले और उससे भी अधिक सोचने वाले संतोष जी मूल्यों की उस पीढ़ी के पत्रकार थे, जिनके लिए कलम रोज़ी नहीं, साधना थी। वे भीड़ में चमकने से ज़्यादा, सच के साथ चुपचाप खड़े रहने में विश्वास रखते थे। कला, संस्कृति, फ़िल्म और विज्ञान—हर विषय पर उनका लेखन केवल जानकारी नहीं देता था, बल्कि पाठक को ठहरकर सोचने पर मजबूर करता था।
सन 2000 की Y2K समस्या पर लिखी उनकी लंबी श्रृंखला आज भी स्मृतियों में जीवित है। जब भविष्य को लेकर डर और भ्रम था, तब संतोष जी ने समझदारी, धैर्य और वैज्ञानिक दृष्टि से समाज को आश्वस्त किया।
फ़िल्मों पर उनकी पकड़ गहरी थी; अनेक फ़िल्मी कलाकारों से उनके आत्मीय संबंध थे, पर उन्होंने कभी उस निकटता को भुनाया नहीं। वे रिश्तों को जीते थे, इस्तेमाल नहीं करते थे।
आज उनके न रहने से ऐसा लगता है जैसे पत्रकारिता की दुनिया से एक शांत दीपक बुझ गया हो—जो तेज़ रोशनी नहीं करता था, पर अंधेरे में दिशा ज़रूर देता था।
उनकी कमी शोर से नहीं, उस मौन से महसूस होगी जो उनके बिना और भी गहरा हो गया है।
संतोष जी, आप चले गए, पर आपकी सोच, आपकी सादगी और आपकी मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता हमारे भीतर प्रश्न बनकर, कसौटी बनकर जीवित रहेगी। यही आपकी सबसे बड़ी विरासत है। भावभीनी श्रद्धांजलि।

वरिष्ठ पत्रकार और कला समीक्षक सर्वेश भट्ट की कलम से

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