लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
60 करोड़ से होगा पशु नस्ल सुधार
200 बीघा में विकसित होगा अत्याधुनिक सेंटर, गाय-भैंस से लेकर ऊंट और घोड़े तक 30 प्रजातियों के संरक्षण व संवर्धन पर होगा काम
जयपुर/पाली। राजस्थान में पशुओं की स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और नस्ल सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के साण्डेराव में देश का पहला और एकमात्र ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म’ विकसित किया जा रहा है। रविवार को पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने सेंटर के प्रशासनिक भवन का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत विकसित किए जा रहे इस सेंटर पर करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होंगे। लगभग 200 बीघा भूमि में विकसित होने वाला यह सेंटर राजस्थान की पारंपरिक और विशिष्ट पशु नस्लों के संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीक के जरिए उनके नस्ल सुधार और संवर्धन का काम करेगा।
गाय से घोड़े तक 30 प्रजातियों पर होगा रिसर्च
पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि सेंटर को करीब दो वर्ष में पूर्ण रूप से विकसित करने का लक्ष्य है। यहां गाय, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट और घोड़े की करीब 30 प्रजातियों के नस्ल सुधार एवं संवर्धन पर शोध किया जाएगा।
विशेष रूप से राजस्थान की स्वदेशी नस्लों पर फोकस रहेगा। गायों में गिर, कांकरेज, राठी, थारपारकर, साहिवाल, नागौरी, मालवी, हरियाणा सहित विभिन्न नस्लों के संरक्षण और सुधार के लिए सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, कृत्रिम गर्भाधान और उन्नत नस्ल के सांडों जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
दुनिया की सबसे छोटी मानी जाने वाली पुंगनूर गाय के संरक्षण और नस्ल सुधार पर भी शोध किया जाएगा।
भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट की नस्लों पर भी ध्यान
सेंटर में स्वदेशी भैंस की मुर्रा, सूरती, जाफराबादी और मेहसाना नस्लों पर काम होगा। वहीं भेड़ की मगरा, मारवाड़ी, नाली, चोकला, पूगल, जैसलमेरी, मालपुरा और सोनाड़ी नस्लों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाएगा।
बकरी की बारबरी, सिरोही, जमनापारी, जखराना, सोजत और मारवाड़ी नस्लों के साथ ऊंट की जैसलमेरी और बीकानेरी नस्ल पर भी शोध होगा। राजस्थान की विशिष्ट मारवाड़ी घोड़ा नस्ल के संरक्षण और संवर्धन को भी परियोजना में शामिल किया गया है।
पशुपालकों को मिलेगा प्रशिक्षण और उन्नत नस्ल के पशु
यह सेंटर केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं रहेगा। इसे पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
पशुपालकों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी देने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही पशुपालन क्षेत्र में स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे। सेंटर से पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी।
15 पदों का होगा सृजन
परियोजना के संचालन के लिए राज्य सरकार के वित्त विभाग ने प्रशासनिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत पशुपालन विभाग में कुल 15 पदों का सृजन किया गया है। इनमें 7 स्थायी और 8 संविदा पद शामिल हैं।
सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन से बनेगा इको-फ्रेंडली सेंटर
सेंटर को आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा। परिसर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा। वहीं पानी की बचत और भूजल स्तर सुधारने के लिए आधुनिक वर्षा जल संचयन प्रणाली विकसित की जाएगी।
सेंटर को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करने की योजना है, जिससे यह पशुपालन, अनुसंधान और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा।
शिलान्यास कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
शिलान्यास समारोह में सरस डेयरी पाली के अध्यक्ष प्रताप सिंह बिठिया, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष करण सिंह नेतरा, सुमेरपुर एसडीएम कालूराम कुम्हार, विकास अधिकारी शैलेंद्र जोशी, निम्बेश्वर महादेव ट्रस्ट साण्डेराव के अध्यक्ष जगत सिंह राणावत, साण्डेराव प्रशासक दाकू देवी, साण्डेराव मंडल अध्यक्ष जोराराम देवासी, समाजसेवी गणपत सिंह देवतरा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, पशुपालन विभाग के अधिकारी, प्रगतिशील पशुपालक और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
