लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष चर्चा आयोजित की गई। यह चर्चा लगभग 10 घंटे चली, जिसमें विभिन्न दलों के सांसदों ने इस राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व पर अपने विचार रखे।
प्रधानमंत्री ने की चर्चा की शुरुआत
सदन में बहस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की।
उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा था, जिसने देशभर के क्रांतिकारियों में स्वाभिमान और स्वतंत्रता का जज़्बा जगाया।”
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि 150 वर्ष बाद यह जरूरी है कि युवाओं को इस गीत के इतिहास और संदर्भ से परिचित कराया जाए।
विपक्ष ने इतिहास और विवादों का मुद्दा उठाया
चर्चा के दौरान कुछ विपक्षी सदस्यों ने यह भी कहा कि वंदे मातरम् का इतिहास सांस्कृतिक विविधता और राजनीतिक बहस दोनों से जुड़ा रहा है।
1937 में गीत की कुछ पंक्तियाँ हटाए जाने के निर्णय का उल्लेख करते हुए विपक्ष ने इसे “ऐतिहासिक बहस का अहम मुद्दा” बताया।
सभी दलों ने गीत के राष्ट्रीय महत्व को स्वीकारा
हालाँकि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सभी दलों ने इस गीत के देश की स्वतंत्रता यात्रा में निभाई भूमिका का सम्मान किया।
कई सांसदों ने सुझाव दिया कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों में वंदे मातरम् के इतिहास और साहित्यिक पक्ष पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
राज्यों में भी विशेष कार्यक्रम प्रस्तावित
संसद में हुई चर्चा के बाद कई राज्य सरकारों ने 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जिले-जिले में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है।
इन कार्यक्रमों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, इतिहास पर व्याख्यान, प्रभात फेरियाँ और युवाओं के लिए जागरूकता अभियान शामिल किए जा सकते हैं।
सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा वर्षभर का समारोह
केंद्र सरकार ने इस अवसर को वर्ष-भर चलने वाले सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
डाक टिकट, स्मारक सिक्का और विशेष प्रदर्शनी जैसी पहल पहले ही शुरू हो चुकी हैं।