लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान जल प्रबंधन और जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक नया मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद जल आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं, जिनमें रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौता प्रमुख हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के बड़े हिस्से में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को जयपुर में आयोजित ‘राजस्थान वाटर कॉन्क्लेव’ को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को नई दिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप दिया है। कैच द रेन, नमामि गंगे, जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना, अमृत सरोवर, हर खेत को पानी और प्रति बूंद अधिक फसल जैसी योजनाओं ने देश में जल सुरक्षा को नई दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के आधार पर वर्तमान पीढ़ी का मूल्यांकन करेंगी, इसलिए जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

विशेषज्ञों से लिया फीडबैक, नवाचार अपनाने का आह्वान
वाटर कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं और विशेषज्ञों से संवाद किया। उन्होंने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन के नवाचारों को अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार, विशेषज्ञों और आमजन की भागीदारी से ही राजस्थान जल आत्मनिर्भर बन सकता है।
17 जिलों को मिलेगा रामजल सेतु लिंक परियोजना का लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामजल सेतु लिंक परियोजना राजस्थान के जल इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।
इस परियोजना से—
- प्रदेश के 17 जिलों में पेयजल सुरक्षा मजबूत होगी।
- करीब 4.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
वहीं यमुना जल समझौते के तहत लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से 1,917 क्यूसेक यमुना जल शेखावाटी पहुंचेगा, जिससे सीकर, झुंझुनूं और चूरू के लगभग 75 लाख लोगों को स्थायी पेयजल राहत मिलेगी।
देवास, नर्मदा और परवन परियोजनाओं पर तेजी से काम
मुख्यमंत्री ने बताया कि—
- उदयपुर की पेयजल जरूरतों के लिए 1,691 करोड़ रुपये की लागत से देवास तृतीय एवं चतुर्थ परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।
- पश्चिमी राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) को मजबूत किया जा रहा है।
- नर्मदा का पानी रानीवाड़ा और भीनमाल तक पहुंचाने की योजना अंतिम चरण में है।
- ब्राह्मणी नदी का पानी बीसलपुर तक लाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
- परवन बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना पर अब तक 1,164 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
जल संरक्षण को बनाया जन आंदोलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान के माध्यम से भामाशाहों, प्रवासी राजस्थानियों और सीएसआर सहयोग से जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है।
इसके अलावा ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत जल स्रोतों की सफाई, पौधारोपण और जनजागरूकता कार्यक्रम व्यापक स्तर पर चलाए जा रहे हैं।
अमृत 2.0 और जल जीवन मिशन से लाखों परिवारों को लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि—
- अमृत 2.0 योजना के तहत 178 शहरी निकायों के लिए 5,100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
- 109 निकायों में कार्यादेश जारी हो चुके हैं।
- जल जीवन मिशन के माध्यम से 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
- अटल भूजल योजना के तहत 485 करोड़ रुपये के जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री सिंचाई टास्क फोर्स बनाई गई है तथा किसान साथी ऐप के जरिए किसानों को सिंचाई जल की उपलब्धता की जानकारी दी जा रही है।
बिजली, रोजगार और निवेश का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और 2027 तक यह सुविधा पूरे राजस्थान में लागू होगी।
उन्होंने दावा किया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के कारण पिछले ढाई वर्षों में कोई पेपर लीक नहीं हुआ। साथ ही सरकार ने 1.78 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी और करीब 4.5 लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया है।
उन्होंने बताया कि राइजिंग राजस्थान के तहत हुए 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू में से 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश धरातल पर उतर चुके हैं।
जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जल संचयन को जन आंदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा कि पानी का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने किसानों से माइक्रो इरिगेशन अपनाने का आग्रह किया और कहा कि सरकार की नीतियों तथा समाज की सक्रिय भागीदारी से राजस्थान को जल समृद्ध राज्य बनाया जा सकता है।
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वर्षों से लंबित जल परियोजनाओं को तेजी से पूरा कर रही है।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पद्मश्री लक्ष्मण सिंह सहित जल संरक्षण क्षेत्र के अनेक विशेषज्ञ एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।