लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उन्हेल, झालावाड़। झालावाड़ जिले के उन्हेल कस्बे स्थित श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ में चातुर्मास के दौरान विराजित आगमोद्धारक श्री समुदायवर्तिनी साध्वी राजरत्नाश्रीजी म.सा. ने कहा कि पर्युषण महापर्व आत्मशुद्धि, संयम, तप और आध्यात्मिक साधना का पर्व है। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से आत्मचिंतन के साथ धर्माराधना और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी राजरत्नाश्रीजी ने कहा कि पर्युषण केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मावलोकन, अपनी भूलों को स्वीकार करने, कषायों के क्षय और जीवन को धर्ममय बनाने का अवसर है। समायिक, पौषध, दान, शील, तप, धर्म और शुभ भावनाओं के माध्यम से व्यक्ति अपने लौकिक जीवन को संस्कारित करने के साथ आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
धर्म और सेवा से समाज में बढ़े करुणा व सद्भाव
साध्वी राजरत्नाश्रीजी ने कहा कि मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए श्रावक-श्राविकाओं को अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए। उन्होंने अमारि प्रवर्तन, साधर्मिक भक्ति, क्षमायाचना और अठ्ठम तप चैत्य परिपाटी जैसे प्रमुख कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए धर्म एवं सेवा के माध्यम से समाज में करुणा, प्रेम और सद्भावना बढ़ाने का संदेश दिया।
देशभर से पहुंचे सैकड़ों आराधक
नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ में पर्युषण आराधना के लिए स्थानीय श्रीसंघ सहित देशभर के विभिन्न श्रीसंघों से सैकड़ों आराधक पहुंचे हैं। श्रद्धालु आठ दिनों तक तीर्थ में ठहरकर विभिन्न धार्मिक क्रियाओं और तप-साधना में सहभागी बन रहे हैं।
तीर्थ परिसर में प्रतिदिन प्रातः सामूहिक प्रार्थना, प्रभातफेरी, पक्षाल, पूजन, प्रवचन और प्रतिक्रमण सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शाम को भक्ति-भावना के कार्यक्रमों में भी श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। पर्युषण महापर्व के दौरान विभिन्न प्रकार की तपस्याओं का क्रम भी जारी है।
विशेष विद्युत सज्जा से सजा तीर्थ परिसर
महापर्व के अवसर पर श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ परिसर में विशेष विद्युत सज्जा की गई है। मंदिर की आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
तीर्थ पेढ़ी के सचिव धर्मचंद जैन ने बताया कि परंपरा के अनुसार इस वर्ष बाहर से आए आराधकों के लिए आठ दिवसीय साधर्मिक भक्ति का लाभ वावनिवासी दोषी रिखबचंद त्रिभुवनदास परिवार, सूरत ने लिया है। पर्युषण महापर्व के दौरान तीर्थ में धर्म, तप और साधना का वातावरण बना हुआ है।