लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
लेखक सूरज सोनी
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सूरज सोनी ने कहा है कि राजस्थान के औद्योगिक क्षितिज पर बाड़मेर के पचपदरा में स्थापित *एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी* परियोजना राज्य के आर्थिक भाग्य को बदलने वाला एक महायज्ञ साबित होने वाला है।
उन्होंने कहा की वर्षों तक राजनीतिक अनिर्णय और प्रशासनिक सुस्ती की बेड़ियों में जकड़ी यह परियोजना आज जिस मुकाम पर है, वह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्णायक नेतृत्व’ और डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का जीवंत प्रमाण है।राजस्थान की राजनीति और विकास के इतिहास में बाड़मेर का पचपदरा क्षेत्र लंबे समय तक केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि राजनीतिक वादों और दावों का अखाड़ा बना रहा। मारवाड़ की तपती रेत के नीचे दबे ‘काले सोने’ (पेट्रोलियम) को निकालने और उसे राज्य की समृद्धि का आधार बनाने का सपना दशकों पुराना है। लेकिन, किसी भी महा परियोजना की सफलता केवल उसकी घोषणा में नहीं, बल्कि उसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने की ‘इच्छाशक्ति’ में निहित होती है।
सोनी के अनुसार वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने पचपदरा रिफाइनरी परियोजना को अपनी प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रखकर गति दी। परिणामस्वरूप यह परियोजना राजस्थान के औद्योगिक पुनर्जागरण और भारतीय राजनीति में ‘डबल इंजन सरकार’ के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनी है।
इस परियोजना के इतिहास से स्पष्ट होता है कि इसकी प्रारंभिक स्वीकृति सितम्बर 2013 के समय दूरदर्शिता का अभाव था। तत्कालीन सरकार ने इसे एक चुनावी हथियार के रूप में अधिक और आर्थिक इंजन के रूप में कम देखा। उस दौर में परियोजना का वित्तीय मॉडल अस्पष्ट था और भूमि चयन को लेकर भी विवाद की स्थितियां बनी रहीं।
परिणाम यह हुआ कि यह योजना केवल शिलापटों और सरकारी फाइलों तक सीमित रह गई। जनता को विकास के सपने तो दिखाए गए, लेकिन धरातल पर काम की गति शून्य रही। निवेश की दुनिया में एक पुरानी कहावत है “देरी से किया गया निर्णय, गलत निर्णय के समान होता है।” पचपदरा के साथ भी वर्षों तक यही हुआ, जिससे न केवल परियोजना की लागत बढ़ी, बल्कि निवेशकों का विश्वास भी डगमगाया।
परियोजना के जीवनकाल में वास्तविक मोड़ 2013 के बाद आया। तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने इस ‘घोषणात्मक प्रोजेक्ट’ के मलबे से एक व्यावहारिक योजना निकालने का बीड़ा उठाया। उस समय एचपीसीएल के साथ मिलकर एचआरआरएल का गठन करना एक गेम-चेंजर साबित हुआ।
इस रिफाइनरी परियोजना को एक ‘पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स’ के रूप में पुनर्कल्पित किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए 16 जनवरी 2018 को किए गए शिलान्यास ने इसे एक राष्ट्रीय मिशन में बदल दिया। यह संदेश स्पष्ट था कि अब काम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि कंक्रीट और स्टील के ऊंचे टावरों के रूप में दिखेगा।
सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर परियोजना की गति में जो अवरोध आए, वे नीतिगत निरंतरता की कमी का उदाहरण बने। प्रशासनिक ढिलाई और केंद्र-राज्य के बीच समन्वय की कमी के कारण प्रोजेक्ट की डेडलाइन बार-बार खिसकती रही। कोविड-19 की चुनौतियों ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया, लेकिन उससे कहीं अधिक घातक था निर्णय लेने की प्रक्रिया में आया आलस्य। लागत का बढ़ना और समय का बीतना प्रत्यक्ष रूप से राज्य के खजाने पर बोझ डाल रहा था। ऐसे समय में राजस्थान को एक ऐसे नेतृत्व की दरकार थी जो न केवल फाइलों को समझे, बल्कि फील्ड पर जाकर बाधाओं को दूर करने का साहस भी रखे।
दिसंबर 2023 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट विजन के साथ काम शुरू किया और इस विजन ने पचपदरा परियोजना में नई जान फूंक दी। उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता ‘अनावश्यक देरी के प्रति शून्य सहनशीलता’ रही है। मुख्यमंत्री ने पदभार संभालते ही रिफाइनरी प्रोजेक्ट की प्रगति की व्यक्तिगत रूप से निगरानी शुरू की।वर्तमान दौर में केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की भजनलाल सरकार के बीच का ‘डबल इंजन’ सामंजस्य अब धरातल पर दिख रहा है।पेट्रोलियम मंत्रालय और राज्य के विभिन्न विभागों के बीच जो संवादहीनता थी, उसे मुख्यमंत्री ने अपनी सक्रियता से समाप्त किया।
आज रिफाइनरी अपने संचालन के निर्णायक चरण में है। क्रूड प्रोसेसिंग की शुरुआत और रिफाइनरी की चिमनियों से उठता धुआं इस बात का प्रमाण है कि राजस्थान अब तेल शोधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने जा रहा है।
भजनलाल सरकार केवल रिफाइनरी चलाने पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि पचपदरा के चारों ओर एक ‘पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र’ भी विकसित कर रही है। इससे डाउन स्ट्रीम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के द्वार खुलेंगे।
यह रिफाइनरी केवल तेल शोधन की इकाई नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन का माध्यम है। बाड़मेर, जो कभी सूखे और अकाल के लिए जाना जाता था, आज राज्य के राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत बनने की राह पर है। भजनलाल सरकार की नीतियों के कारण स्थानीय कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है, ताकि क्षेत्र के युवाओं को इस विशाल उद्योग में सम्मानजनक रोजगार मिल सके। यह सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही का ही परिणाम है कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियां राजस्थान में निवेश के लिए उत्साहित हैं।
भाजपा नेता सूरज सोनी ने कहा लोकतंत्र में श्रेय लेने की राजनीति सामान्य है। विपक्ष आज भी इस परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश करता है, लेकिन जनता का अनुभव कहता है कि विकास केवल नींव रखने से नहीं, बल्कि छत डालने से पूरा होता है। यदि 2023 के बाद भजनलाल सरकार ने इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता नहीं दी होती, तो आज भी राजस्थान अपनी तेल संपदा के लिए अन्य राज्यों की रिफाइनरियों पर निर्भर होता। राजनीति में ‘कथनी’ और ‘करनी’ का अंतर ही यह तय करता है कि जनता का विश्वास किस पर होगा।
और अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक शांत और संयमित नेतृत्व कितने बड़े और जटिल बदलाव ला सकता है। यह परियोजना न केवल राजस्थान को आर्थिक रूप से सशक्त करेगी, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगी।
आज जब राजस्थान एक औद्योगिक महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, तब यह स्वीकार करना होगा कि इस यात्रा की धुरी वह अटूट प्रतिबद्धता है जो भजनलाल सरकार ने विकास के प्रति दिखाई है। पचपदरा की यह सफलता आगामी दशकों तक राजस्थान की प्रगति की गाथा लिखती रहेगी। यह केवल एक रिफाइनरी का शुभारंभ नहीं है, बल्कि राजस्थान के सुनहरे भविष्य का राज्याभिषेक है।














































