लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत को हमेशा “युद्ध जैसी परिस्थितियों” के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं (indigenous defence capabilities) को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि आत्मनिर्भर भारत का असली आधार मजबूत रक्षा उद्योग है।
“कभी भी कुछ भी हो सकता है”
एक रक्षा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा,
“कभी भी कुछ भी हो सकता है। हमें हमेशा अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियाँ अस्थिर हैं और भारत को अपनी रक्षा प्रणालियों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर जोर
रक्षा मंत्री ने रक्षा उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और सशस्त्र बलों से आह्वान किया कि वे मिलकर काम करें ताकि भारत विदेशी हथियारों और तकनीक पर निर्भर न रहे।
उन्होंने कहा,
“मजबूत भारत वही होगा जिसकी तकनीक, हथियार और रणनीति उसके अपने होंगे।”
सरकार पहले ही Defence Acquisition Procedure (DAP) 2020 लागू कर चुकी है, जिसके तहत बड़े रक्षा सौदों में भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाती है।
क्षेत्रीय तनावों के बीच संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा मंत्री का यह बयान मौजूदा सीमा तनावों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए आया है।
भारत अब अपने सैन्य आधुनिकीकरण और तत्परता को लेकर अधिक गंभीर रुख अपना रहा है।
दीर्घकालिक लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि भारत वर्ष 2030 तक एक वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र (Global Defence Hub) बने।
वर्तमान में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश है, और पिछले कुछ वर्षों में स्वदेशी उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है।
राजनाथ सिंह का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
एक अनिश्चित वैश्विक माहौल में यह संदेश साफ है —
भारत तैयार है, सक्षम है और आत्मनिर्भर बन रहा है।















































