लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सैकड़ों लापता, 133 भारतीयों के भी फंसे होने की खबर
कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर मची तबाही, सड़कें-पुल और बुनियादी ढांचा बर्बाद; भारत ने राहत सामग्री भेजी, पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की बात
राजस्थान से वरिष्ठ संवाददाता : नितिन मेहरा
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। रसुवा सहित कई इलाकों में बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने सड़कें, पुल, मकान और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। नेपाल पुलिस के अनुसार मृतकों की संख्या 157 तक पहुंच गई थी, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह आंकड़ा 160 के आसपास बताया गया है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है।
इस प्राकृतिक आपदा ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है। नेपाली अधिकारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी जानकारी के अनुसार 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना है। इनमें बड़ी संख्या में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में लापता भारतीयों की संख्या और अधिक होने की आशंका भी जताई गई है, इसलिए आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर भीषण तबाही
फ्लैश फ्लड का सबसे गंभीर असर नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े उन इलाकों में पड़ा है, जहां से होकर कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालु गुजरते हैं। अचानक आए पानी और मलबे के सैलाब ने कई मार्गों को बाधित कर दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक भारतीयों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित कई देशों के पर्यटक भी प्रभावित क्षेत्र में थे। संपर्क व्यवस्था बाधित होने के कारण यात्रियों के परिजनों की चिंता बढ़ गई है।
ग्लेशियर और चट्टानों के ढहने से आई तबाही
शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप को बाढ़ का संभावित कारण माना जा रहा था, लेकिन बाद के वैज्ञानिक आकलनों में ग्लेशियर, बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के ढहने से पैदा हुए मलबे के तेज बहाव को आपदा का प्रमुख कारण बताया गया है। इस मलबे ने नदी के प्रवाह को अचानक बढ़ा दिया और कुछ ही समय में निचले इलाकों में भारी तबाही मचा दी।
सेना और पुलिस ने संभाला मोर्चा
नेपाल सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा है। नेपाल सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और घायलों को निकालने का अभियान चलाया जा रहा है।
हालांकि पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल बह जाने के कारण बचाव दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर मलबे और पानी के तेज बहाव के कारण जमीनी रास्ते पूरी तरह कट गए हैं।
पीएम मोदी ने नेपाल को दिया मदद का भरोसा
आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल के साथ खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
भारत की ओर से राहत सामग्री भी नेपाल भेजी गई है। रिपोर्टों के अनुसार भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान से राहत सामग्री काठमांडू भेजी गई, जबकि अतिरिक्त संसाधनों को जरूरत के अनुसार तैयार रखा गया है।
परिवारों में बढ़ी चिंता
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय श्रद्धालुओं के संपर्क से बाहर होने के बाद उनके परिजन लगातार जानकारी जुटाने में लगे हैं। प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल और अन्य संचार सेवाएं बाधित होने से स्थिति और जटिल हो गई है।
भारतीय मिशन और स्थानीय प्रशासन प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने तथा सुरक्षित निकासी के लिए नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं।
तबाही का दायरा बढ़ने की आशंका
नेपाल-तिब्बत सीमा के पहाड़ी इलाकों में आई इस आपदा ने पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बुरी तरह प्रभावित किया है। सड़कें और पुल टूटने के साथ कई बिजली एवं जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
बचाव दलों की कोशिश है कि दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जाए। हालांकि लापता लोगों की संख्या और प्रभावित क्षेत्रों का वास्तविक आकलन राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर संपर्क से बाहर हुए भारतीय श्रद्धालुओं को लेकर है। भारत और नेपाल की एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं और आने वाले घंटों में लापता लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
